प्रकृतमनुससार नाभिनेयं
प्रविकसदङ्गुलि पाणिपल्लवं वा ।
प्रथममुपहितं विलासि चक्षुः
सिततुरगे न चचाल नर्तकीनाम् ॥
प्रकृतमनुससार नाभिनेयं
प्रविकसदङ्गुलि पाणिपल्लवं वा ।
प्रथममुपहितं विलासि चक्षुः
सिततुरगे न चचाल नर्तकीनाम् ॥
प्रविकसदङ्गुलि पाणिपल्लवं वा ।
प्रथममुपहितं विलासि चक्षुः
सिततुरगे न चचाल नर्तकीनाम् ॥
अन्वयः
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नर्तकीनां प्रविकसदङ्गुलि पाणिपल्लवं वा अभिनेयं प्रकृतं न अनुससार। सिततुरगे प्रथमम् उपहितं विलासि चक्षुः न चचाल।
English Summary
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Neither the sprout-like hands with their expressive fingers, nor the theme to be enacted, were followed. The playful eyes of the dancing Apsaras, once they were first set upon Arjuna, did not waver from him.
सारांश
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नर्तकियों ने अभिनय या हस्त-मुद्राओं से पहले ही अपनी विकसित कमलों जैसी आँखों को अर्जुन पर स्थिर कर दिया, जो वहाँ से तनिक भी विचलित नहीं हुईं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
प्रकृतमिति ॥ विलासि सविलासं नर्तकीनां संबन्धि।
शिल्पिनि ष्वुन् (अष्टाध्यायी ३.१.१४५ ) इति ष्वुन्प्रत्ययः। 'नृत्तिखनिरञ्जिभ्य एव' इति नियमः । चक्षुः कर्तृ प्रकृतं प्रकान्तमभिनेयमभिनेतव्यं रसभावादिव्यञ्जकं नानुससार । तद्दूषणं तदानुगुण्येनैव दृष्टिप्रयोगनियमादिति भावः। तथा प्रविकसदङ्गुलि चञ्चलाङ्गुलि पाणिपल्लवं वा नानुससार ।स च दोषः ।'यतो हस्तस्ततो दृष्टिः' इति नियमादिति भावः । पल्लवोऽस्त्री किसलयम् इत्यमरः (अमरकोशः २.४.१४ ) ।'वा स्याद्विकल्पोपमयोरेवार्थे च समुच्चये (अष्टाध्यायी ३.४.५ ) इति विश्वः । किंतु प्रथमं प्रवेश एव सिततुरगेऽर्जुन उपहितं सन्न चचाल तत्रैव लग्नं तस्थौ। रागान्धैर्न किंचित्करणीयमनुसंधेयमिति भावः ।
पदच्छेदः
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| प्रकृतम् | प्रकृत (२.१) | the subject matter |
| अनुससार | अनुससार (अनु√सृ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | followed |
| न | न | not |
| अभिनेयम् | अभिनेय (१.१) | the theme to be enacted |
| प्रविकसदङ्गुलि | प्रविकसत्–अङ्गुलि (१.१) | with expressive fingers |
| पाणिपल्लवम् | पाणि–पल्लव (१.१) | The sprout-like hand |
| वा | वा | or |
| प्रथमम् | प्रथमम् | first |
| उपहितम् | उपहित (उप√धा+क्त, १.१) | placed |
| विलासि | विलासिन् (१.१) | playful |
| चक्षुः | चक्षुस् (१.१) | the eye |
| सिततुरगे | सित–तुरग (७.१) | on Arjuna |
| न | न | not |
| चचाल | चचाल (√चल् कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | wavered |
| नर्तकीनाम् | नर्तकी (६.३) | Of the dancing girls |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | कृ | त | म | नु | स | सा | र | ना | भि | ने | यं | |
| प्र | वि | क | स | द | ङ्गु | लि | पा | णि | प | ल्ल | वं | वा |
| प्र | थ | म | मु | प | हि | तं | वि | ला | सि | च | क्षुः | |
| सि | त | तु | र | गे | न | च | चा | ल | न | र्त | की | नाम् |
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