श्वसनचलितपल्लवाधरोष्ठे
नवनिहितेर्ष्यमिवावधूनयन्ती ।
मधुसुरभिणि षट्पदेन पुष्पे
मुख इव शाललतावधूश्चुचुम्बे ॥
श्वसनचलितपल्लवाधरोष्ठे
नवनिहितेर्ष्यमिवावधूनयन्ती ।
मधुसुरभिणि षट्पदेन पुष्पे
मुख इव शाललतावधूश्चुचुम्बे ॥
नवनिहितेर्ष्यमिवावधूनयन्ती ।
मधुसुरभिणि षट्पदेन पुष्पे
मुख इव शाललतावधूश्चुचुम्बे ॥
अन्वयः
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शाललतावधूः षट्पदेन मधुसुरभिणि श्वसनचलितपल्लवाधरोष्ठे पुष्पे मुखे इव स्थिते सति, नवनिहिताम् ईर्ष्यम् अवधूनयन्ती इव चुचुम्बे।
English Summary
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A bee kissed a flower of the Shala creeper, which was personified as a bride. The flower, fragrant with honey, was like a face whose sprout-like lower lip trembled in the breeze. The creeper-bride, as if shaking off newly-arisen jealousy, was kissed by the bee on its flower-face.
सारांश
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हवा से हिलते पल्लव रूपी अधरों वाली शाललता रूपी वधू को भौंरे ने जब चूमा, तो वह ईर्ष्या वश कांपते होठों वाली नायिका जैसी लगी।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
श्वसनेति ॥ षट्पदेनालिना । शाललता सर्जतरुशाखा वधूरिव शाललतावधूः । 'प्राकारग्रहयोः शालः शालः सर्जतरुः स्मृतः इति शाश्वतः।श्वसनेन वायुना नि:श्वासेन च चलितः पल्लवोऽधरोष्ठ इव पल्लवाधरोष्ठो यत्र तस्मिन् । 'ओत्वोष्ठयोः समासे वा पररूपं वक्तव्यम्' । मधुना मकरन्देन मद्येन च सुरक्षिणि सुगन्धिनि पुष्पे मुख इव नवं यथा तथा निहितेर्ष्यं कृतकोपमिवेति क्रियाविशेषणम् । तथावधूनयन्ती कम्पयन्ती । 'धूञ्प्रीञोर्नुम्वक्तव्यः' इति णिचि नुमागमः । चुचुम्वे चुम्बिता । अत्र श्वसनशब्दार्थमधुशब्दार्थयोश्च स्वस्वभेदाध्यवसायाच्छ्लेषमूलातिशयोक्तिः । सा चोपमाङ्गमित्यनयोः संकरः ॥
पदच्छेदः
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| श्वसनचलितपल्लवाधरोष्ठे | श्वसन–चलित–पल्लव–अधरोष्ठ (७.१) | on which the sprout-like lower lip was moved by the breeze |
| नवनिहितेर्ष्यमिव | नवनिहिता–ईर्ष्यम्–इव | as if shaking off newly-arisen jealousy |
| अवधूनयन्ती | अवधूनयन्ती (अव√धू+णिच्+शतृ+ङीप्, १.१) | shaking off |
| मधुसुरभिणि | मधु–सुरभि (७.१) | fragrant with honey |
| षट्पदेन | षट्पद (३.१) | by a bee |
| पुष्पे | पुष्प (७.१) | on the flower |
| मुखे | मुख (७.१) | on the face |
| इव | इव | like |
| शाललतावधूः | शाल–लता–वधू (१.१) | The bride that is the Shala creeper |
| चुचुम्बे | चुचुम्बे (√चुम्ब् भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was kissed |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| श्व | स | न | च | लि | त | प | ल्ल | वा | ध | रो | ष्ठे | |
| न | व | नि | हि | ते | र्ष्य | मि | वा | व | धू | न | य | न्ती |
| म | धु | सु | र | भि | णि | ष | ट्प | दे | न | पु | ष्पे | |
| मु | ख | इ | व | शा | ल | ल | ता | व | धू | श्चु | चु | म्बे |
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