अन्वयः
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घनसमयेन धृतबिसवलयावलिः कुमुदवनैकदुकूलं वहन्ती आत्तबाणा वधूः इव शरद् अमलतले सरोजपाणौ आललम्बे।
English Summary
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Autumn, personified as a bride, made her appearance. She wore bracelets of lotus stalks, a garment of water-lily groves, and held arrows of kasha flowers. Brought in by the rainy season, she rested upon the spotless earth, her hand being a lotus.
सारांश
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शरद ऋतु रूपी वधू ने, जिसने कुमुद के श्वेत वस्त्र धारण किए थे और हाथ में कमल रूपी बाण लिए थे, वर्षा ऋतु का आलिंगन किया।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
धृतेति ॥ बिसानि वलयानीव तेषामावलिर्धृता ययासा । कुमुदवनमेकं मुख्यं दुकूलमिव तद्वहन्ती । आत्ता गृहीता बाणा नीलझिण्टी यया सात्तबाणा, धृतशरा च ।
गृह्णीयात्क्षत्रिया शरम् इति स्मरणात् । बाणोक्ता नीलझिण्टी च इति वैजयन्ती। शरद्वधूर्जायेव धनसमयेन वर्षर्तुना । वरेणेति शेषः । अमलतले निर्मलतले सरोजं पाणिरिव तस्मिन्नाललम्बे जगृहे । कर्मणि लिट् । वधूवरसमागमवदृतुसंधिरशोभतेत्यर्थः । अत्र आत्तबाणा इति झिण्टीशरयोर्बाणयोरभेदाध्यवसायाच्छ्लेषमूलातिशयोक्तिरुपमाङ्गमित्यनयोः संकरः ॥ अथर्तुसंधि वर्णयति
पदच्छेदः
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| धृतबिसवलयावलिः | धृत (√धृ+क्त)–बिस–वलय–आवलि (१.१) | she who wore a string of lotus-stalk bracelets |
| वहन्ती | वहन्ती (√वह्+शतृ+ङीप्, १.१) | carrying |
| कुमुदवनैकदुकूलम् | कुमुद–वन–एक–दुकूल (२.१) | a single silk garment of a water-lily forest |
| आत्तबाणा | आत्त (आ√दा+क्त)–बाण (१.१) | she who had taken arrows (of Kasha flowers) |
| शरदमलतले | शरद्–अमल–तल (७.१) | on the spotless surface of autumn |
| सरोजपाणौ | सरोज–पाणि (७.१) | on the lotus-hand |
| घनसमयेन | घनसमय (३.१) | by the rainy season |
| वधूः | वधू (१.१) | a bride |
| इव | इव | like |
| आललम्बे | आललम्बे (आ√लम्ब् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | leaned/was supported |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| धृ | त | बि | स | व | ल | या | व | लि | र्व | ह | न्ती | |
| कु | मु | द | व | नै | क | दु | कू | ल | मा | त्त | बा | णा |
| श | र | द | म | ल | त | ले | स | रो | ज | पा | णौ | |
| घ | न | स | म | ये | न | व | धू | रि | वा | ल | ल | म्बे |
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