अन्वयः
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प्रति-दिशम् अभिगच्छता ककुभ-विकास-सुगन्धिना अनिलेन अभिमृष्टः स-चित्त-जन्मा जीव-लोकः नवः इव विबभौ, गत-धृतिः आकुलितः च (अभवत्)।
English Summary
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Touched by the wind blowing in every direction, fragrant with the blossoming of Kakubha flowers, the world of living beings, with passions aroused, shone as if renewed, yet it also lost its composure and became agitated.
सारांश
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चारों दिशाओं में अर्जुन वृक्षों के विकास की सुगंध लेकर बहने वाले पवन ने विचलित प्राणियों में कामदेव के नवीन प्रादुर्भाव जैसा संचार कर दिया।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
प्रतिदिशमिति ॥ दिशि दिशि प्रतिदिशम् । यथार्थेऽव्ययीभावः । शरत्प्रभृतित्वात् समासान्तनिपातः। अभिगच्छता संवाता ककुभान्यर्जुनकुसुमानि ।
इन्द्रद्रुः ककुभोऽर्जुनः इत्यमरः (अमरकोशः २.४.४५ ) । तेषां विकासेन सुगन्धिना मनोज्ञगन्धेन । गन्धस्येत्वे तदेकान्तग्रहणं प्रायिकम् । अनिलेनाविमृष्टः संस्पृष्टोऽत एव सचित्तजन्मा । कामाक्रान्त इत्यर्थः । अत एव गतधृतिर्गतधैर्य आकुलितः क्षोभितश्च । रतिं प्रतीति भावः । एवंभूतो जीवलोको नव इवावस्थान्तरप्राप्त्यापूर्व इव विबभौ भाति स्मेत्युत्प्रेक्षा ॥
पदच्छेदः
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| प्रतिदिशम् | प्रतिदिशम् | in every direction |
| अभिगच्छता | अभिगच्छत् (अभि√गम्+शतृ, ३.१) | going towards |
| अभिमृष्टः | अभिमृष्ट (अभि√मृश्+क्त, १.१) | touched |
| ककुभविकाससुगन्धिना | ककुभ–विकास–सुगन्धिन् (३.१) | fragrant with the blossoming of Kakubha flowers |
| अनिलेन | अनिल (३.१) | by the wind |
| नव | नव (१.१) | new |
| इव | इव | as if |
| विबभौ | विबभौ (वि√भा कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | shone |
| सचित्तजन्मा | स–चित्तजन्मन् (१.१) | with Kamadeva aroused |
| गतधृतिः | गत–धृति (१.१) | having lost composure |
| आकुलितः | आकुलित (१.१) | agitated |
| च | च | and |
| जीवलोकः | जीवलोक (१.१) | the world of living beings |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | ति | दि | श | म | भि | ग | च्छ | ता | भि | मृ | ष्टः | |
| क | कु | भ | वि | का | स | सु | ग | न्धि | ना | नि | ले | न |
| न | व | इ | व | वि | ब | भौ | स | चि | त्त | ज | न्मा | |
| ग | त | धृ | ति | रा | कु | लि | त | श्च | जी | व | लो | कः |
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