सजलजलधरं नभो विरेजे
विवृतिमियाय रुचिस्तडिल्लतानाम् ।
व्यवहितरतिविग्रहैर्वितेने
जलगुरुभिः स्तनितैर्दिगन्तरेषु ॥
सजलजलधरं नभो विरेजे
विवृतिमियाय रुचिस्तडिल्लतानाम् ।
व्यवहितरतिविग्रहैर्वितेने
जलगुरुभिः स्तनितैर्दिगन्तरेषु ॥
विवृतिमियाय रुचिस्तडिल्लतानाम् ।
व्यवहितरतिविग्रहैर्वितेने
जलगुरुभिः स्तनितैर्दिगन्तरेषु ॥
अन्वयः
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नभः स-जल-जल-धरं विरेजे। तटित्-लतानां रुचिः विवृतिम् इयाय। व्यवहित-रति-विग्रहैः जल-गुरुभिः स्तनितैः दिक्-अन्तरेषु वितेने।
English Summary
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The sky shone with water-laden clouds. The brilliance of the lightning-creepers became manifest. The sound of thunder, heavy with rain and known to interrupt the union of lovers, spread through all quarters of the sky.
सारांश
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मेघों से भरे आकाश, चमकती बिजली और बादलों के गंभीर गर्जन ने दसों दिशाओं में प्रेम और रति के अनुकूल वातावरण बना दिया।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
सजला जलधरा यस्मिंस्तन्नभो विरेजे । तडितो लता इव तासां रुचिः प्रभा विवृतिं विजृम्भणमियाय । तथा व्यवहितरतिविग्रहैर्दूरीकृतरतिप्रकल्पितप्रणयकलहैर्जलगुरुभिः। जलभाराद्गम्भीरैरित्यर्थः । स्तनितैर्गर्जितैर्दिगन्तरेषु वितेने विततैरभावि। भावे लिट्। अकर्मकत्वं वैवक्षिकम् । अत एव दिगन्तरेष्वित्यधिकरणत्वेन प्रयोगः । अन्यथा कर्मत्वमेव स्यात् ॥
पदच्छेदः
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| सजलजलधरम् | सजल–जलधर (१.१) | with water-laden clouds |
| नभः | नभस् (१.१) | the sky |
| विरेजे | विरेजे (वि√राज् कर्तरि लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | shone |
| विवृतिमियाय | विवृत्ति (२.१)–इयाय (√इ कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | became manifest |
| रुचिः | रुचि (१.१) | the brilliance |
| तडिल्लतानाम् | तडित्–लता (६.३) | of the lightning-creepers |
| व्यवहितरतिविग्रहैः | व्यवहित (वि+अव√धा+क्त)–रति–विग्रह (३.३) | by those which interrupt the union of lovers |
| वितेने | वितेने (वि√तन् भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was spread |
| जलगुरुभिः | जल–गुरु (३.३) | heavy with water |
| स्तनितैः | स्तनित (३.३) | by the thunders |
| दिगन्तरेषु | दिक्–अन्तर (७.३) | in the quarters of the sky |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | ज | ल | ज | ल | ध | रं | न | भो | वि | रे | जे | |
| वि | वृ | ति | मि | या | य | रु | चि | स्त | डि | ल्ल | ता | नाम् |
| व्य | व | हि | त | र | ति | वि | ग्र | है | र्वि | ते | ने | |
| ज | ल | गु | रु | भिः | स्त | नि | तै | र्दि | ग | न्त | रे | षु |
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