सपदि हरिसखैर्वधूनिदेशा-
द्ध्वनितमनोरमवल्लकीमृदङ्गैः ।
युगपद् ऋतुगणस्य संनिधानं
वियति वने च यथायथं वितेने ॥
सपदि हरिसखैर्वधूनिदेशा-
द्ध्वनितमनोरमवल्लकीमृदङ्गैः ।
युगपद् ऋतुगणस्य संनिधानं
वियति वने च यथायथं वितेने ॥
द्ध्वनितमनोरमवल्लकीमृदङ्गैः ।
युगपद् ऋतुगणस्य संनिधानं
वियति वने च यथायथं वितेने ॥
अन्वयः
AI
सपदि वधू-निदेशात् ध्वनित-मनोरम-वल्लकी-मृदङ्गैः हरि-सखैः ऋतु-गणस्य संनिधानं वियति वने च यथा-यथं युगपत् वितेने।
English Summary
AI
Immediately, at the command of the women, the Gandharvas, friends of Indra, playing their charming lutes and drums, simultaneously brought about the presence of all the seasons, each manifesting appropriately in the sky and the forest.
सारांश
AI
इंद्र के मित्रों के निर्देश पर संगीत की ध्वनि के साथ आकाश और वन में सभी ऋतुएँ एक साथ उपस्थित हो गईं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
सपदीति । सपदि वधूनां निदेशानियोगाद्ध्वनिता नादितामनोरमा वल्लक्यो विणा मृदङ्गाश्च यैस्तैर्हरिसखैर्गन्धर्वैर्वियत्याकाशे वने च युगपद्दतुगपणस्यतुर्षट्कस्य संनिधानमाविर्भावो यथायथं यथास्वम् । असंकरेणेत्यर्थः।
यथास्वं तु यथायथम्इति निपातः। वितेने वितस्तरे । उद्दीपनसामग्री संपादितेत्यर्थः ॥ अथ वर्षाक्रमेणर्तून्वर्णयति-सजलेत्यादि ।
पदच्छेदः
AI
| सपदि | सपदि | immediately |
| हरिसखैः | हरिसख (३.३) | by the friends of Indra |
| वधूनिदेशात् | वधू–निदेश (५.१) | at the command of the women |
| ध्वनितमनोरमवल्लकीमृदङ्गैः | ध्वनित–मनोरम–वल्लकी–मृदङ्ग (३.३) | by those who played charming lutes and drums |
| युगपत् | युगपत् | simultaneously |
| ऋतुगणस्य | ऋतु–गण (६.१) | of the group of seasons |
| संनिधानम् | संनिधान (२.१) | presence |
| वियति | वियत् (७.१) | in the sky |
| वने | वन (७.१) | in the forest |
| च | च | and |
| यथायथम् | यथायथम् | appropriately |
| वितेने | वितेने (वि√तन् भावकर्मणोः लिट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | was spread |
छन्दः
पुष्पिताग्रा []
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | प | दि | ह | रि | स | खै | र्व | धू | नि | दे | शा | |
| द्ध्व | नि | त | म | नो | र | म | व | ल्ल | की | मृ | द | ङ्गैः |
| यु | ग | प | दृ | तु | ग | ण | स्य | सं | नि | धा | नं | |
| वि | य | ति | व | ने | च | य | था | य | थं | वि | ते | ने |
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.