तदाशु कर्तुं त्वयि जिह्ममुद्यते
विधीयतां तत्र विधेयमुत्तरम् ।
परप्रणीतानि वचांसि चिन्वतां
प्रवृत्तिसाराः खलु मादृशां धियः ॥
तदाशु कर्तुं त्वयि जिह्ममुद्यते
विधीयतां तत्र विधेयमुत्तरम् ।
परप्रणीतानि वचांसि चिन्वतां
प्रवृत्तिसाराः खलु मादृशां धियः ॥
विधीयतां तत्र विधेयमुत्तरम् ।
परप्रणीतानि वचांसि चिन्वतां
प्रवृत्तिसाराः खलु मादृशां धियः ॥
अन्वयः
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तत् त्वयि जिह्मं कर्तुम् उद्यते (सति), तत्र विधेयम् उत्तरम् आशु विधीयताम्। खलु पर-प्रणीतानि वचांसि चिन्वतां मादृशां धियः प्रवृत्ति-साराः (भवन्ति)।
English Summary
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Therefore, since he is preparing to act deceitfully towards you, the proper counter-measure should be decided upon quickly. The minds of people like me are only for reporting facts; our duty is merely to gather and convey the words of others.
सारांश
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शत्रु द्वारा कपट की योजना बनाने पर आपको भी प्रतिकार हेतु उचित उपाय करना चाहिए; मुझ जैसे गुप्तचरों का काम केवल दूसरों के गुप्त वृत्तांत की सूचना देना मात्र है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
तदिति ॥ तत्तस्मात्वयि जिह्मं कपटं कर्तुमुद्यते । त्वां जिघांसावित्यर्थः । तत्र तस्मिन्दुर्योधने विधेयं कर्तव्यमुतरं प्रतिक्रियाशु विधीयतां क्रियताम् । ननु कर्तव्यमपि त्वयैवोच्यतामिति चेत्तत्राह-परेति । परप्रणीतानि परोक्तानि वचांसि चिन्वतांगवेषयतां मादृशाम् । वार्ताहारिणामित्यर्थः । गिरः प्रवृत्तिसारा वार्तामात्रसाराः खलु ।
वार्ता प्रवृत्तिर्वृत्तान्तःइत्यमरः (अमरकोशः १.६.७ ) । वार्तामात्रवादिनो वयम्, न तु कर्तव्यार्थोपदेशसमर्थाः। अस्तस्त्वयैव निर्धार्य कार्यमिति भावः । सामान्येन विशेषसमर्थनादर्थान्तरन्यासः ॥ इतरयित्वा गिरमात्तसत्क्रिये गतेऽथ पत्यौ वनसंनिवासिनाम् । प्रविश्य कृष्णासदनं महीभुजा तदाचचक्षेऽनुजसंनिधौ वचः
पदच्छेदः
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| तत् | तत् | therefore |
| आशु | आशु | quickly |
| कर्तुम् | कर्तुम् (√कृ+तुमुन्) | to act |
| त्वयि | युष्मद् (७.१) | towards you |
| जिह्मम् | जिह्म (२.१) | deceitfully |
| उद्यते | उद्यत (उत्√यम्+क्त, ७.१) | since he is preparing |
| विधीयताम् | विधीयताम् (वि√धा भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | should be decided |
| तत्र | तत्र | in that matter |
| विधेयम् | विधेय (वि√धा+यत्, १.१) | what is to be done |
| उत्तरम् | उत्तर (१.१) | the counter-measure |
| परप्रणीतानि | परप्रणीत (२.३) | spoken by others |
| वचांसि | वचस् (२.३) | words |
| चिन्वताम् | चिन्वत् (√चि+शतृ, ६.३) | of those who gather |
| प्रवृत्तिसाराः | प्रवृत्तिसार (१.३) | whose essence is reporting facts |
| खलु | खलु | indeed |
| मादृशाम् | मादृश (६.३) | of those like me |
| धियः | धी (१.३) | the minds |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | दा | शु | क | र्तुं | त्व | यि | जि | ह्म | मु | द्य | ते |
| वि | धी | य | तां | त | त्र | वि | धे | य | मु | त्त | रम् |
| प | र | प्र | णी | ता | नि | व | चां | सि | चि | न्व | तां |
| प्र | वृ | त्ति | सा | राः | ख | लु | मा | दृ | शां | धि | यः |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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