प्रलीनभूपालमपि स्थिरायति
प्रशासदावारिधि मण्डलं भुवः ।
स चिन्तयत्येव भियस्त्वदेष्यती-
रहो दुरन्ता बलवद्विरोधिता ॥
प्रलीनभूपालमपि स्थिरायति
प्रशासदावारिधि मण्डलं भुवः ।
स चिन्तयत्येव भियस्त्वदेष्यती-
रहो दुरन्ता बलवद्विरोधिता ॥
प्रशासदावारिधि मण्डलं भुवः ।
स चिन्तयत्येव भियस्त्वदेष्यती-
रहो दुरन्ता बलवद्विरोधिता ॥
अन्वयः
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सः प्रलीन-भूपालम् अपि भुवः मण्डलं आ-वारिधि प्रशासत् (अपि), स्थिरायति (सन्) त्वत्-एष्यतीः भियः चिन्तयति एव। अहो! बलवत्-विरोधिता दुरन्ता (हि)।
English Summary
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Though he rules the earth up to the oceans, with all other kings subdued and his future secure, he constantly thinks of the dangers that will come from you. Alas, enmity with the powerful has dreadful consequences!
सारांश
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यद्यपि दुर्योधन निष्कंटक होकर समुद्र तक फैली पृथ्वी पर शासन कर रहा है, फिर भी वह आपसे होने वाले आगामी भय से चिंतित रहता है; बलवानों से शत्रुता का परिणाम अत्यंत दुखद होता है।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
प्रलीनेति ॥ स दुर्योधनः प्रलीनभूपालम् । निःसपत्नमित्यर्थः। स्थिरायति। चिरस्थायीत्यर्थः। भुवो मण्डलमावारिधिभ्य आवारिधि। आङ्गर्यादाभिविध्योः' इत्यव्ययीभावः । प्रशासदाज्ञापयन्नपि ।
जक्षित्यादयः षट् (अष्टाध्यायी ६.१.६ ) इत्यभ्यस्तसंज्ञा । 'नाभ्यस्ताच्छतुः (अष्टाध्यायी ७.१.७८ ) इति नुमागमप्रतिषेधः । त्वत्त्वत्त एष्यतीरागमिष्यतीः । धातूनामनेकार्थत्वादुक्तार्थसिद्धिः। अथवाङ्पूर्वः पाठः । 'एत्येधत्यूठ्सु (अष्टाध्यायी ६.१.८९ ) इति वृद्धिः । 'लुटः सद्भाः', इति शतृप्रत्ययः। 'उगितश्च' इति ङीप्, आच्छीनद्योर्नुम् (अष्टाध्यायी ७.१.८० ) इति विकल्पान्नुम्भावः। भियो भयहेतून्। विपद इत्यर्थः। चिन्तयत्यालोचयत्येव। स एवाह-अहो बलवद्धिरोधिता दुनन्ता दुष्टावसाना। सार्वभौमस्यापि प्रबलैः सह वैरायमाणत्वमनर्थपर्यवसाय्येवेति तात्पर्यम्। सामान्येन विशेष———ननु गूढाकारेङ्गितस्य तस्य भयं त्वया कथं निरधारीत्यत्राह
पदच्छेदः
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| प्रलीनभूपालम् | प्रलीनभूपाल (२.१) | in which other kings are subdued |
| अपि | अपि | even |
| स्थिरायति | स्थिरायति (१.१) | with a secure future |
| प्रशासत् | प्रशासत् (प्र√शास्+शतृ, १.१) | ruling |
| आवारिधि | आवारिधि | up to the ocean |
| मण्डलम् | मण्डल (२.१) | the realm |
| भुवः | भू (६.१) | of the earth |
| सः | तद् (१.१) | he |
| चिन्तयति | चिन्तयति (√चिन्त् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | thinks |
| एव | एव | constantly |
| भियः | भी (२.३) | of the dangers |
| त्वदेष्यतीः | त्वदेष्यन्ती (२.३) | coming from you |
| अहो | अहो | alas |
| दुरन्ता | दुरन्त (१.१) | has dreadful consequences |
| बलवद्विरोधिता | बलवद्विरोधिता (१.१) | enmity with the powerful |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | ली | न | भू | पा | ल | म | पि | स्थि | रा | य | ति |
| प्र | शा | स | दा | वा | रि | धि | म | ण्ड | लं | भु | वः |
| स | चि | न्त | य | त्ये | व | भि | य | स्त्व | दे | ष्य | ती |
| र | हो | दु | र | न्ता | ब | ल | व | द्वि | रो | धि | ता |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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