न तेन सज्यं क्वचिदुद्यतं धनु-
र्न वा कृतं कोपविजिह्ममाननम् ।
गुणानुरागेण शिरोभिरुह्यते
नराधिपैर्माल्यमिवास्य शासनम् ॥
न तेन सज्यं क्वचिदुद्यतं धनु-
र्न वा कृतं कोपविजिह्ममाननम् ।
गुणानुरागेण शिरोभिरुह्यते
नराधिपैर्माल्यमिवास्य शासनम् ॥
र्न वा कृतं कोपविजिह्ममाननम् ।
गुणानुरागेण शिरोभिरुह्यते
नराधिपैर्माल्यमिवास्य शासनम् ॥
अन्वयः
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तेन क्वचित् सज्यं धनुः न उद्यतम्, कोप-विजिह्मम् आननं वा न कृतम्। अस्य शासनं नराधिपैः गुण-अनुरागेण माल्यम् इव शिरोभिः उह्यते।
English Summary
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He has never raised his strung bow, nor has he contorted his face in anger. His command, out of affection for his virtues, is borne on the heads of other kings like a garland.
सारांश
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दुर्योधन को अब धनुष उठाने या क्रोध प्रकट करने की आवश्यकता नहीं पड़ती; उसके गुणों के कारण अन्य राजा उसके शासन को माला की भाँति श्रद्धापूर्वक अपने सिर पर धारण करते हैं।
घण्टापथव्याख्या (मल्लिनाथः)
नेति ॥ तेन राज्ञा क्वचित्कुत्रापि । सह ज्यया मौर्व्या सज्यम्। मौर्वी ज्या शिञ्जिनी गुणः' इत्यमरः ।
तेन सहेति तुल्ययोगे (अष्टाध्यायी २.२.२८ ) इति बहुव्रीहिः। धनुर्नोद्यतं नोर्ध्वीकृतम् । आननं व कोपविजिह्मं कोपकुटिलं न कृतम्। यस्य कोप एवं नोदेति कुतस्तस्य युद्धप्रसक्तिरिति भावः । कथं तर्ह्याज्ञां कारयति राज्ञ इत्यत्राह—गुणैति। गुणेषु दयादाक्षिण्यादिष्वनुरागेण प्रेम्णः । माल्यपक्षे सूत्रानुषङ्गेण । यद्वा सौरभ्यगुणलोभेन। नराधिपैरस्य शासनमाज्ञा । मालैव माल्यं तदिव । 'चातुर्वर्ण्यादित्वात्स्वार्थे ष्यञ्' इति क्षीरस्वामी। शिरोभिरुह्यते धार्यते । वचिस्वपियजादीनां किति (अष्टाध्यायी ६.१.१५ ) इति यकि संप्रसारणम् । अत्रोपमा स्फुटैव ॥। संप्रत्यस्य धार्मिकत्वमाह
पदच्छेदः
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| न | न | not |
| तेन | तद् (३.१) | by him |
| सज्यम् | सज्य (१.१) | strung |
| क्वचित् | क्वचित् | ever |
| उद्यतम् | उद्यत (उत्√यम्+क्त, १.१) | raised |
| धनुः | धनुस् (१.१) | bow |
| न | न | not |
| वा | वा | or |
| कृतम् | कृत (√कृ+क्त, १.१) | made |
| कोपविजिह्मम् | कोपविजिह्म (१.१) | distorted with anger |
| आननम् | आनन (१.१) | face |
| गुणानुरागेण | गुणानुराग (३.१) | out of affection for his virtues |
| शिरोभिः | शिरस् (३.३) | on their heads |
| उह्यते | उह्यते (√वह् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is borne |
| नराधिपैः | नराधिप (३.३) | by kings |
| माल्यम् | माल्य (१.१) | a garland |
| इव | इव | like |
| अस्य | इदम् (६.१) | his |
| शासनम् | शासन (१.१) | command |
छन्दः
वंशस्थम् [१२: जतजर]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | ते | न | स | ज्यं | क्व | चि | दु | द्य | तं | ध | नु |
| र्न | वा | कृ | तं | को | प | वि | जि | ह्म | मा | न | नम् |
| गु | णा | नु | रा | गे | ण | शि | रो | भि | रु | ह्य | ते |
| न | रा | धि | पै | र्मा | ल्य | मि | वा | स्य | शा | स | नम् |
| ज | त | ज | र | ||||||||
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