गरीयान् मे प्रेमा त्वयि परमिति स्नेहलघुता
न जीविष्यामीति प्रणयगरिमख्यापनविधिः ।
कथं नायासीति स्मरणपरिपाटीप्रकटनं
हरौ सन्देशाय प्रियसखि न मे वागवसरः ॥
गरीयान् मे प्रेमा त्वयि परमिति स्नेहलघुता
न जीविष्यामीति प्रणयगरिमख्यापनविधिः ।
कथं नायासीति स्मरणपरिपाटीप्रकटनं
हरौ सन्देशाय प्रियसखि न मे वागवसरः ॥
न जीविष्यामीति प्रणयगरिमख्यापनविधिः ।
कथं नायासीति स्मरणपरिपाटीप्रकटनं
हरौ सन्देशाय प्रियसखि न मे वागवसरः ॥
अन्वयः
AI
प्रियसखि, मे त्वयि गरीयान् प्रेमा इति स्नेह-लघुता, न जीविष्यामीति प्रणय-गरिम-ख्यापन-विधिः, कथम् न आयासि इति स्मरण-परिपाटी-प्रकटनम्, हरौ सन्देशाय मे वाक्-अवसरः न॥
Summary
AI
O dear friend, to say "My love for you is great" would be a trivialization. To say "I shall not live" is a way of boasting about my love. To ask "Why do you not come?" is merely showing off my remembrances. Thus, there is no scope for my words to send a message to Hari.
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ग | री | या | न्मे | प्रे | मा | त्व | यि | प | र | मि | ति | स्ने | ह | ल | घु | ता |
| न | जी | वि | ष्या | मी | ति | प्र | ण | य | ग | रि | म | ख्या | प | न | वि | धिः |
| क | थं | ना | या | सी | ति | स्म | र | ण | प | रि | पा | टी | प्र | क | ट | नं |
| ह | रौ | स | न्दे | शा | य | प्रि | य | स | खि | न | मे | वा | ग | व | स | रः |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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