अये रासक्रीडारसिक मम सख्यां नवनवा
पुरा बद्धा येन प्रणयलहरी हन्त गहना ।
स चेन् मुक्तापेक्षस्त्वमपि धिग् इमां तुलशकलं
यदेतस्या नासानिहितमिदमद्यापि चलति ॥
अये रासक्रीडारसिक मम सख्यां नवनवा
पुरा बद्धा येन प्रणयलहरी हन्त गहना ।
स चेन् मुक्तापेक्षस्त्वमपि धिग् इमां तुलशकलं
यदेतस्या नासानिहितमिदमद्यापि चलति ॥
पुरा बद्धा येन प्रणयलहरी हन्त गहना ।
स चेन् मुक्तापेक्षस्त्वमपि धिग् इमां तुलशकलं
यदेतस्या नासानिहितमिदमद्यापि चलति ॥
अन्वयः
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अये रास-क्रीडा-रसिक, पुरा येन मम सख्याम् नव-नवा गहना प्रणय-लहरी बद्धा, हन्त, सः त्वम् अपि चेत् मुक्त-अपेक्षः असि, तर्हि इमाम् तुल-शकलम् धिक्, यत् एतस्याः नासा-निहितम् इदम् अद्यापि चलति॥
Summary
AI
O enjoyer of the rāsa dance, if even you, who previously bound my friend with ever-new and deep waves of love, have now become indifferent, then fie upon this piece of cotton! It is shameful that it still moves, placed at her nose to check for breath.
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ये | रा | स | क्री | डा | र | सि | क | म | म | स | ख्यां | न | व | न | वा |
| पु | रा | ब | द्धा | ये | न | प्र | ण | य | ल | ह | री | ह | न्त | ग | ह | ना |
| स | चे | न्मु | क्ता | पे | क्ष | स्त्व | म | पि | धि | गि | मां | तु | ल | श | क | लं |
| य | दे | त | स्या | ना | सा | नि | हि | त | मि | द | म | द्या | पि | च | ल | ति |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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