किमाविष्टा भूतैः सपदि यदि वाक्रूरफणिना
क्षतापस्मारेण च्युतमतिरकस्मात् किमपतत् ।
इति व्यग्रैरस्यां गुरुभिरभितः कीचकरव-
श्रवादस्पन्दायां मुरहर विकल्पा विदधिरे ॥
किमाविष्टा भूतैः सपदि यदि वाक्रूरफणिना
क्षतापस्मारेण च्युतमतिरकस्मात् किमपतत् ।
इति व्यग्रैरस्यां गुरुभिरभितः कीचकरव-
श्रवादस्पन्दायां मुरहर विकल्पा विदधिरे ॥
क्षतापस्मारेण च्युतमतिरकस्मात् किमपतत् ।
इति व्यग्रैरस्यां गुरुभिरभितः कीचकरव-
श्रवादस्पन्दायां मुरहर विकल्पा विदधिरे ॥
अन्वयः
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मुर-हर, कीचक-रव-श्रवात् अस्पन्दायाम् अस्याम् 'किम् सपदि भूतैः आविष्टा, यदि वा अक्रूर-फणिना क्षता, अपस्मारेण च्युत-मतिः अकस्मात् किम् अपतत्' इति व्यग्रैः गुरुभिः अभितः विकल्पाः विदधिरे।
Summary
AI
O *Murahara*! When she became motionless upon hearing the sound of the hollow bamboos, her anxious elders made various conjectures: "Is she possessed by spirits? Or bitten by the serpent *Akrūra*? Has she suddenly fallen, losing consciousness due to epilepsy?"
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कि | मा | वि | ष्टा | भू | तैः | स | प | दि | य | दि | वा | क्रू | र | फ | णि | ना |
| क्ष | ता | प | स्मा | रे | ण | च्यु | त | म | ति | र | क | स्मा | त्कि | म | प | तत् |
| इ | ति | व्य | ग्रै | र | स्यां | गु | रु | भि | र | भि | तः | की | च | क | र | व |
| श्र | वा | द | स्प | न्दा | यां | मु | र | ह | र | वि | क | ल्पा | वि | द | धि | रे |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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