तरङ्गैः कुर्वाणा शमनभगिनीलाघवमसौ
नदीं कांचिद्गोष्ठे नयनजलपूरैरजनयत् ।
इतीवास्या द्वेषादभिमतदशाप्रार्थनमयीं
मुरारे विज्ञप्तिं निशमयति मानी न शमनः ॥
तरङ्गैः कुर्वाणा शमनभगिनीलाघवमसौ
नदीं कांचिद्गोष्ठे नयनजलपूरैरजनयत् ।
इतीवास्या द्वेषादभिमतदशाप्रार्थनमयीं
मुरारे विज्ञप्तिं निशमयति मानी न शमनः ॥
नदीं कांचिद्गोष्ठे नयनजलपूरैरजनयत् ।
इतीवास्या द्वेषादभिमतदशाप्रार्थनमयीं
मुरारे विज्ञप्तिं निशमयति मानी न शमनः ॥
अन्वयः
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असौ नयन-जल-पूरैः गोष्ठे काम्-चित् नदीं तरङ्गैः शमन-भगिनी-लाघवम् कुर्वाणा अजनयत्। मुर-अरे, मानी शमनः इव इति अस्याः द्वेषात् अभिमत-दशा-प्रार्थना-मयीं विज्ञप्तिं न निशमयति।
Summary
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With the flood of her tears, she has created a river in the cowherd village that mocks the *Yamunā* (the sister of *Yama*) with its waves. O *Murāri*, it seems the proud *Yama*, out of spite for this, refuses to hear her prayer for her desired end (death).
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | र | ङ्गैः | कु | र्वा | णा | श | म | न | भ | गि | नी | ला | घ | व | म | सौ |
| न | दीं | कां | चि | द्गो | ष्ठे | न | य | न | ज | ल | पू | रै | र | ज | न | यत् |
| इ | ती | वा | स्या | द्वे | षा | द | भि | म | त | द | शा | प्रा | र्थ | न | म | यीं |
| मु | रा | रे | वि | ज्ञ | प्तिं | नि | श | म | य | ति | मा | नी | न | श | म | नः |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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