वयं त्यक्ताः स्वामिन् यदि तव किं दूषणमिदं
निसर्गः श्यामानामयमतितरां दुष्परिहरः ।
कुहूकण्ठैरण्डावधि सह निवासात् परिचिता
विसृज्यन्ते सद्यः कलितनवपक्षैर्वलिभुजः ॥
वयं त्यक्ताः स्वामिन् यदि तव किं दूषणमिदं
निसर्गः श्यामानामयमतितरां दुष्परिहरः ।
कुहूकण्ठैरण्डावधि सह निवासात् परिचिता
विसृज्यन्ते सद्यः कलितनवपक्षैर्वलिभुजः ॥
निसर्गः श्यामानामयमतितरां दुष्परिहरः ।
कुहूकण्ठैरण्डावधि सह निवासात् परिचिता
विसृज्यन्ते सद्यः कलितनवपक्षैर्वलिभुजः ॥
अन्वयः
AI
स्वामिन्, यदि वयम् त्यक्ताः, तव किम् इदं दूषणम्? श्यामानाम् अयम् अतितराम् दुष्परिहरः निसर्गः (अस्ति)। वलि-भुजः कुहू-कण्ठैः अण्ड-अवधि सह-निवासात् परिचिताः (अपि) कलित-नव-पक्षैः सद्यः विसृज्यन्ते।
Summary
AI
O Master, if we are abandoned, what fault is yours? This is the unavoidable nature of those who are dark-complexioned (*śyāma*). Even crows (*valibhuj*), who are familiar with cuckoos from the egg stage, are abandoned by them as soon as they grow new feathers.
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| व | यं | त्य | क्ताः | स्वा | मि | न्य | दि | त | व | किं | दू | ष | ण | मि | दं | |
| नि | स | र्गः | श्या | मा | ना | म | य | म | ति | त | रां | दु | ष्प | रि | ह | रः |
| कु | हू | क | ण्ठै | र | ण्डा | व | धि | स | ह | नि | वा | सा | त्प | रि | चि | ता |
| वि | सृ | ज्य | न्ते | स | द्यः | क | लि | त | न | व | प | क्षै | र्व | लि | भु | जः |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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