कथं सङ्गोऽस्माभिः सह समुचितः सम्प्रति हरे-
रयं ग्राम्या नार्यस्त्वमसि नृपकन्यार्चितपदः ।
गतः कालो यस्मिन् पशुपरमणीसङ्गमकृते
भवान् व्यग्रस्तस्थौ तमसि गृहवाटिविटपिनि ॥
कथं सङ्गोऽस्माभिः सह समुचितः सम्प्रति हरे-
रयं ग्राम्या नार्यस्त्वमसि नृपकन्यार्चितपदः ।
गतः कालो यस्मिन् पशुपरमणीसङ्गमकृते
भवान् व्यग्रस्तस्थौ तमसि गृहवाटिविटपिनि ॥
रयं ग्राम्या नार्यस्त्वमसि नृपकन्यार्चितपदः ।
गतः कालो यस्मिन् पशुपरमणीसङ्गमकृते
भवान् व्यग्रस्तस्थौ तमसि गृहवाटिविटपिनि ॥
अन्वयः
AI
सम्प्रति अस्माभिः सह हरेः सङ्गः कथं समुचितः? अयम् ग्राम्याः नार्यः (सन्ति), त्वम् असि नृप-कन्या-अर्चित-पदः। सः कालः गतः यस्मिन् भवान् पशुप-रमणी-सङ्गम-कृते गृह-वाटी-विटपिनि तमसि व्यग्रः तस्थौ।
Summary
AI
How is an association with us appropriate for *Hari* now? These are but rustic women, while Your feet are worshiped by princesses. Gone is the time when You would wait anxiously in the darkness by the trees of our garden just to meet the cowherd women.
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | थं | स | ङ्गो | ऽस्मा | भिः | स | ह | स | मु | चि | तः | स | म्प्र | ति | ह | रे |
| र | यं | ग्रा | म्या | ना | र्य | स्त्व | म | सि | नृ | प | क | न्या | र्चि | त | प | दः |
| ग | तः | का | लो | य | स्मि | न्प | शु | प | र | म | णी | स | ङ्ग | म | कृ | ते |
| भ | वा | न्व्य | ग्र | स्त | स्थौ | त | म | सि | गृ | ह | वा | टि | वि | ट | पि | नि |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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