किमेभिर्व्याहारैः कलय कथयामि स्फुटमहं
सखे निःसन्देहं परिचयपदं केवलमिदम् ।
परानन्दो यस्मिन् नयनपदवीभ्राजि भविता
त्वया विज्ञातव्या मधुररव सोऽयं मधुरिपुः ॥
किमेभिर्व्याहारैः कलय कथयामि स्फुटमहं
सखे निःसन्देहं परिचयपदं केवलमिदम् ।
परानन्दो यस्मिन् नयनपदवीभ्राजि भविता
त्वया विज्ञातव्या मधुररव सोऽयं मधुरिपुः ॥
सखे निःसन्देहं परिचयपदं केवलमिदम् ।
परानन्दो यस्मिन् नयनपदवीभ्राजि भविता
त्वया विज्ञातव्या मधुररव सोऽयं मधुरिपुः ॥
अन्वयः
AI
सखे, एभिः व्याहारैः किम्? कलय, अहं स्फुटं कथयामि, इदं केवलं निःसन्देहं परिचय-पदम् (अस्ति)। मधुर-रव, यस्मिन् पर-आनन्दः नयन-पदवी-भ्राजि भविता, त्वया सः अयम् मधुरिपुः विज्ञातव्याः।
Summary
AI
Friend, what is the use of these many words? Listen, I tell you clearly; this is the unmistakable mark of recognition. O sweet-voiced one, when that supreme bliss shines within the range of your vision, you must recognize Him as *Madhuripu* (*Kṛṣṇa*).
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| कि | मे | भि | र्व्या | हा | रैः | क | ल | य | क | थ | या | मि | स्फु | ट | म | हं |
| स | खे | निः | स | न्दे | हं | प | रि | च | य | प | दं | के | व | ल | मि | दम् |
| प | रा | न | न्दो | य | स्मि | न्न | य | न | प | द | वी | भ्रा | जि | भ | वि | ता |
| त्व | या | वि | ज्ञा | त | व्या | म | धु | र | र | व | सो | ऽयं | म | धु | रि | पुः |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.