निधायाङ्के पङ्केरुहदलविटङ्कस्य ललिता
ततो राधां नीराहरणसरणौ न्यस्तचरणा ।
मिलन्तं कालिन्दीपुलिनभुवि खेलाञ्चितगतिं
ददर्शाग्रे कंचिन् मधुरविरुतं श्वेतगरुतम् ॥
निधायाङ्के पङ्केरुहदलविटङ्कस्य ललिता
ततो राधां नीराहरणसरणौ न्यस्तचरणा ।
मिलन्तं कालिन्दीपुलिनभुवि खेलाञ्चितगतिं
ददर्शाग्रे कंचिन् मधुरविरुतं श्वेतगरुतम् ॥
ततो राधां नीराहरणसरणौ न्यस्तचरणा ।
मिलन्तं कालिन्दीपुलिनभुवि खेलाञ्चितगतिं
ददर्शाग्रे कंचिन् मधुरविरुतं श्वेतगरुतम् ॥
अन्वयः
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ततः ललिता राधां पङ्केरुह-दल-विटङ्कस्य अङ्के निधाय नीर-आहरण-सरणी न्यस्त-चरणा कालिन्दी-पुलिन-भुवि मिलन्तम् खेला-अञ्चित-गतिम् कंचिद् मधुर-विरुतं श्वेत-गरुतं ददर्श।
Summary
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Placing Rādhā on a bed of lotus petals, Lalitā stepped toward the path used for fetching water. There, on the sandy banks of the Yamunā, she beheld a white-winged swan. The bird moved with a playful grace and uttered sweet sounds as it wandered along the shore.
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | धा | या | ङ्के | प | ङ्के | रु | ह | द | ल | वि | ट | ङ्क | स्य | ल | लि | ता |
| त | तो | रा | धां | नी | रा | ह | र | ण | स | र | णौ | न्य | स्त | च | र | णा |
| मि | ल | न्तं | का | लि | न्दी | पु | लि | न | भु | वि | खे | ला | ञ्चि | त | ग | तिं |
| द | द | र्शा | ग्रे | कं | चि | न्म | धु | र | वि | रु | तं | श्वे | त | ग | रु | तम् |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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