रुचीनमुल्लासैर्मरकतमयस्थूलकदली-
कदम्बाहंकारं कवलयति यस्योरुयुगलम् ।
यदालानस्तम्भद्यूउतिमवललम्बे कलवतां
मदादुद्दामानां पशुपरमणीचित्तकरिणीम् ॥
रुचीनमुल्लासैर्मरकतमयस्थूलकदली-
कदम्बाहंकारं कवलयति यस्योरुयुगलम् ।
यदालानस्तम्भद्यूउतिमवललम्बे कलवतां
मदादुद्दामानां पशुपरमणीचित्तकरिणीम् ॥
कदम्बाहंकारं कवलयति यस्योरुयुगलम् ।
यदालानस्तम्भद्यूउतिमवललम्बे कलवतां
मदादुद्दामानां पशुपरमणीचित्तकरिणीम् ॥
अन्वयः
AI
यस्य ऊरु-युगलम् रुचीनम् उल्लासैः मरकत-मय-स्थूल-कदली-कदम्ब-अहंकारम् कवलयति, यत् कलवताम् मदात् उद्दामानाम् पशु-परमणी-चित्त-करिणीम् आलान-स्तम्भ-द्युतिम् अवललम्बे।
Summary
AI
His pair of thighs, through their radiant splendor, devours the pride of a cluster of thick emerald-hued plantain trees. They serve as the post to which the minds of the cowherd girls, like she-elephants wild with passion and sweet sounds, are securely tied.
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| रु | ची | न | मु | ल्ला | सै | र्म | र | क | त | म | य | स्थू | ल | क | द | ली | |
| क | द | म्बा | हं | का | रं | क | व | ल | य | ति | य | स्यो | रु | यु | ग | लम् | |
| य | दा | ला | न | स्त | म्भ | द्यू | उ | ति | म | व | ल | ल | म्बे | क | ल | व | तां |
| म | दा | दु | द्दा | मा | नां | प | शु | प | र | म | णी | चि | त्त | क | रि | णीम् | |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | |||||||||||
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