शिनीनामुत्तंसः कलितकृतवर्माप्य् उभयतः
प्रणेष्यते बालव्यजनयुगलान्दोलनविधिम् ।
स जानुभ्यामष्टापदभुवनमवष्टभ्य भविता
गुरोः शिष्यो नूनं पदकमलसंवाहनरतः ॥
शिनीनामुत्तंसः कलितकृतवर्माप्य् उभयतः
प्रणेष्यते बालव्यजनयुगलान्दोलनविधिम् ।
स जानुभ्यामष्टापदभुवनमवष्टभ्य भविता
गुरोः शिष्यो नूनं पदकमलसंवाहनरतः ॥
प्रणेष्यते बालव्यजनयुगलान्दोलनविधिम् ।
स जानुभ्यामष्टापदभुवनमवष्टभ्य भविता
गुरोः शिष्यो नूनं पदकमलसंवाहनरतः ॥
अन्वयः
AI
शिनीनाम् उत्तंसः कलित-कृतवर्मा अपि उभयतः बाल-व्यजन-युगल-आन्दोलन-विधिम् प्रणेष्यते, सः जानुभ्याम् अष्टापद-भुवनम् अवष्टभ्य नूनम् गुरोः शिष्यः पद-कमल-संवाहन-रतः भविता।
Summary
AI
The crown of the *Śinis* (*Sātyaki*) and *Kṛtavarmā* will be fanning him from both sides with a pair of fly-whisks. One who is truly a disciple of his teacher, kneeling on the golden floor, will be devotedly massaging his lotus feet.
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| शि | नी | ना | मु | त्तं | सः | क | लि | त | कृ | त | व | र्मा | प्यु | भ | य | तः | |
| प्र | णे | ष्य | ते | बा | ल | व्य | ज | न | यु | ग | ला | न्दो | ल | न | वि | धिम् | |
| स | जा | नु | भ्या | म | ष्टा | प | द | भु | व | न | म | व | ष्ट | भ्य | भ | वि | ता |
| गु | रोः | शि | ष्यो | नू | नं | प | द | क | म | ल | सं | वा | ह | न | र | तः | |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | |||||||||||
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