अलिन्दे यस्यास्ते मरकतमयी यष्टिरमला
शयालुर्यां रात्रौ मदकलकलापी कलयति ।
निराटङ्कस्त्स्याः शिखरमधिरुह्य श्रमनुदं
प्रतीक्षेथा भ्रातर्वरमवसरं यादवपतेः ॥
अलिन्दे यस्यास्ते मरकतमयी यष्टिरमला
शयालुर्यां रात्रौ मदकलकलापी कलयति ।
निराटङ्कस्त्स्याः शिखरमधिरुह्य श्रमनुदं
प्रतीक्षेथा भ्रातर्वरमवसरं यादवपतेः ॥
शयालुर्यां रात्रौ मदकलकलापी कलयति ।
निराटङ्कस्त्स्याः शिखरमधिरुह्य श्रमनुदं
प्रतीक्षेथा भ्रातर्वरमवसरं यादवपतेः ॥
अन्वयः
AI
यस्याः अलिन्दे मरकत-मयी अमला यष्टिः आस्ते, याम् रात्रौ मद-कल-कलापी शयालुः कलयति, भ्रातः! निराटङ्कः तस्याः शिखरम् अधिरुह्य श्रम-नुदम् यादव-पतेः वरम् अवसरम् प्रतीक्षेथा।
Summary
AI
On its veranda stands a pure emerald perch where a sweet-sounding peacock rests at night. O brother, fearlessly climbing to the top of that perch, wait for the perfect opportunity to meet the Lord of the *Yādavas* while shaking off your fatigue.
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | लि | न्दे | य | स्या | स्ते | म | र | क | त | म | यी | य | ष्टि | र | म | ला |
| श | या | लु | र्यां | रा | त्रौ | म | द | क | ल | क | ला | पी | क | ल | य | ति |
| नि | रा | ट | ङ्क | स्त्स्याः | शि | ख | र | म | धि | रु | ह्य | श्र | म | नु | दं | |
| प्र | ती | क्षे | था | भ्रा | त | र्व | र | म | व | स | रं | या | द | व | प | तेः |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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