यदुत्सङ्गे तुङ्गस्फटिकरचिताः सन्ति परितो
मरालामाणिक्यप्रकरघटितत्रौटिचरणाः ।
सुहृद्बुद्ध्या हंसाः कलितमधुरस्याम्बुजभुवः
समर्यादं येषां सपदि परिचर्यां विदधीत ॥
यदुत्सङ्गे तुङ्गस्फटिकरचिताः सन्ति परितो
मरालामाणिक्यप्रकरघटितत्रौटिचरणाः ।
सुहृद्बुद्ध्या हंसाः कलितमधुरस्याम्बुजभुवः
समर्यादं येषां सपदि परिचर्यां विदधीत ॥
मरालामाणिक्यप्रकरघटितत्रौटिचरणाः ।
सुहृद्बुद्ध्या हंसाः कलितमधुरस्याम्बुजभुवः
समर्यादं येषां सपदि परिचर्यां विदधीत ॥
अन्वयः
AI
यत्-उत्सङ्गे तुङ्ग-स्फटिक-रचिताः मरालाः परितः सन्ति, येषां माणिक्य-प्रकर-घटित-त्रौटि-चरणाः सन्ति, अम्बुज-भुवः कलित-मधुरस्य हंसाः सुहृद्-बुद्ध्या सपदि समर्यादं परिचर्यां विदधीत।
Summary
AI
In the courtyard of that palace, there are swans carved from tall crystals. Real swans of *Brahmā*, hearing their sweet calls, mistake them for friends and immediately offer respectful service to these crystal figures, which possess beaks and feet crafted from clusters of rubies.
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | दु | त्स | ङ्गे | तु | ङ्ग | स्फ | टि | क | र | चि | ताः | स | न्ति | प | रि | तो |
| म | रा | ला | मा | णि | क्य | प्र | क | र | घ | टि | त | त्रौ | टि | च | र | णाः |
| सु | हृ | द्बु | द्ध्या | हं | साः | क | लि | त | म | धु | र | स्या | म्बु | ज | भु | वः |
| स | म | र्या | दं | ये | षां | स | प | दि | प | रि | च | र्यां | वि | द | धी | त |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.