अथ क्रामं क्रामं क्रमघटनया सङ्कटतरान्
निवासान् वृष्णीनामनुसर पुरीमध्यविशिखान् ।
मुरारातेर्यत्र स्थगितगगनाभिर् विजयते
पताकाभिः सन्तर्पितभुवनमन्तःपुरवरं ॥
अथ क्रामं क्रामं क्रमघटनया सङ्कटतरान्
निवासान् वृष्णीनामनुसर पुरीमध्यविशिखान् ।
मुरारातेर्यत्र स्थगितगगनाभिर् विजयते
पताकाभिः सन्तर्पितभुवनमन्तःपुरवरं ॥
निवासान् वृष्णीनामनुसर पुरीमध्यविशिखान् ।
मुरारातेर्यत्र स्थगितगगनाभिर् विजयते
पताकाभिः सन्तर्पितभुवनमन्तःपुरवरं ॥
अन्वयः
AI
अथ क्रम-घटनया सङ्कट-तरान् वृष्णीनाम् निवासान् क्रामं क्रामं अनुसर, यत्र पुरी-मध्य-विशिखान् स्थगित-गगनाभिः पताकाभिः सन्तर्पित-भुवनम् मुर-अरातेः अन्तःपुर-वरम् विजयते।
Summary
AI
Then, proceed step by step through the narrow residences of the *Vṛṣṇis*. Follow the city streets to where the magnificent inner quarters of *Murāri* triumph. This palace, which delights the world, is adorned with flags that reach and conceal the sky.
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | थ | क्रा | मं | क्रा | मं | क्र | म | घ | ट | न | या | स | ङ्क | ट | त | रा |
| न्नि | वा | सा | न्वृ | ष्णी | ना | म | नु | स | र | पु | री | म | ध्य | वि | शि | खान् |
| मु | रा | रा | ते | र्य | त्र | स्थ | गि | त | ग | ग | ना | भि | र्वि | ज | य | ते |
| प | ता | का | भिः | स | न्त | र्पि | त | भु | व | न | म | न्तः | पु | र | व | रं |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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