तदा निष्पन्दाङ्गी कलितनलिनीपल्लवकुलैः
परीणाहात् प्रेम्नामकुशलशताशङ्किहृदयैः ।
दृगम्भोगम्भीरीकृतमिहिरपुत्रीलहरिभिः
विलीना धूलीनामुपरि परिवव्रे परिजनैः ॥
तदा निष्पन्दाङ्गी कलितनलिनीपल्लवकुलैः
परीणाहात् प्रेम्नामकुशलशताशङ्किहृदयैः ।
दृगम्भोगम्भीरीकृतमिहिरपुत्रीलहरिभिः
विलीना धूलीनामुपरि परिवव्रे परिजनैः ॥
परीणाहात् प्रेम्नामकुशलशताशङ्किहृदयैः ।
दृगम्भोगम्भीरीकृतमिहिरपुत्रीलहरिभिः
विलीना धूलीनामुपरि परिवव्रे परिजनैः ॥
अन्वयः
AI
तदा निष्पन्द-अङ्गी कलित-नलिनी-पल्लव-कुलैः प्रेम्णाम् परीणाहात् अकुशल-शत-आशङ्कि-हृदयैः दृक्-अम्भः-गम्भीरी-कृत-मिहिरपुत्री-लहरिभिः परिजनैः धूलीनाम् उपरि विलीना परिवव्रे।
Summary
AI
As she lay motionless on the dust, her friends surrounded her. Their hearts, overflowing with love, were filled with a hundred fears for her well-being. They fanned her with lotus leaves, while the tears from their eyes merged with the waves of the Yamunā, deepening its flow as they watched over her senseless form.
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | दा | नि | ष्प | न्दा | ङ्गी | क | लि | त | न | लि | नी | प | ल्ल | व | कु | लैः |
| प | री | णा | हा | त्प्रे | म्ना | म | कु | श | ल | श | ता | श | ङ्कि | हृ | द | यैः |
| दृ | ग | म्भो | ग | म्भी | री | कृ | त | मि | हि | र | पु | त्री | ल | ह | रि | भिः |
| वि | ली | ना | धू | ली | ना | मु | प | रि | प | रि | व | व्रे | प | रि | ज | नैः |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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