मुहुर्लस्यक्रीडाप्रमदमिलदाहोपुरुषिका
विकाशेन भ्रष्टैः फणिमणिकुलैर्धूमलरुचौ ।
पुरस्तस्मिन् नीपद्रुमकुसुमकिञ्जल्कसुरभौ
त्वया पुण्ये पेयं मधुरमुदकं कालियह्रदे ॥
मुहुर्लस्यक्रीडाप्रमदमिलदाहोपुरुषिका
विकाशेन भ्रष्टैः फणिमणिकुलैर्धूमलरुचौ ।
पुरस्तस्मिन् नीपद्रुमकुसुमकिञ्जल्कसुरभौ
त्वया पुण्ये पेयं मधुरमुदकं कालियह्रदे ॥
विकाशेन भ्रष्टैः फणिमणिकुलैर्धूमलरुचौ ।
पुरस्तस्मिन् नीपद्रुमकुसुमकिञ्जल्कसुरभौ
त्वया पुण्ये पेयं मधुरमुदकं कालियह्रदे ॥
अन्वयः
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मुहुः लस्य-क्रीडा-प्रमद-मिलत्-आहोपुरुषिका-विकाशेन भ्रष्टैः फणि-मणि-कुलैः धूमल-रुचौ नीप-द्रुम-कुसुम-किञ्जल्क-सुरभौ तस्मिन् पुण्ये कालिय-ह्रदे त्वया मधुरं उदकं पेयं ॥
Summary
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You should drink the sweet water of the holy *Kāliya* lake, which is fragrant with the pollen of *Kadamba* flowers. Its waters are darkened by the heap of gems fallen from the hoods of the serpent *Kāliya* during his arrogant display of dancing before *Kṛṣṇa*.
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मु | हु | र्ल | स्य | क्री | डा | प्र | म | द | मि | ल | दा | हो | पु | रु | षि | का |
| वि | का | शे | न | भ्र | ष्टैः | फ | णि | म | णि | कु | लै | र्धू | म | ल | रु | चौ |
| पु | र | स्त | स्मि | न्नी | प | द्रु | म | कु | सु | म | कि | ञ्ज | ल्क | सु | र | भौ |
| त्व | या | पु | ण्ये | पे | यं | म | धु | र | मु | द | कं | का | लि | य | ह्र | दे |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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