अकस्मादस्माकं हरिरपहरन्न् अंशुकचयं
यमारूढो गूढप्रणयलहरीं कन्दलयितुम् ।
तवाश्रान्तस्यान्तःस्थगितरविबिम्बः किसलयैः
कदम्बः कादम्ब त्वरितमवलम्बः स भविता ॥
अकस्मादस्माकं हरिरपहरन्न् अंशुकचयं
यमारूढो गूढप्रणयलहरीं कन्दलयितुम् ।
तवाश्रान्तस्यान्तःस्थगितरविबिम्बः किसलयैः
कदम्बः कादम्ब त्वरितमवलम्बः स भविता ॥
यमारूढो गूढप्रणयलहरीं कन्दलयितुम् ।
तवाश्रान्तस्यान्तःस्थगितरविबिम्बः किसलयैः
कदम्बः कादम्ब त्वरितमवलम्बः स भविता ॥
अन्वयः
AI
कादम्ब! अस्माकम् अंशुक-चयं हरन् गूढ-प्रणय-लहरीं कन्दलयितुम् अकस्मात् यम् आरूढः, किसलयैः अन्तः-स्थगित-रवि-बिम्बः सः कदम्बः तव आश्रान्तस्य त्वरितम् अवलम्बः भविता।
Summary
AI
O swan! The kadamba tree, which Hari once climbed to steal our clothes and sprout waves of secret love, will be your support. Its dense foliage hides the sun's orb, providing a cool refuge for you when you grow weary.
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | क | स्मा | द | स्मा | कं | ह | रि | र | प | ह | र | न्नं | शु | क | च | यं |
| य | मा | रू | ढो | गू | ढ | प्र | ण | य | ल | ह | रीं | क | न्द | ल | यि | तुम् |
| त | वा | श्रा | न्त | स्या | न्तः | स्थ | गि | त | र | वि | बि | म्बः | कि | स | ल | यैः |
| क | द | म्बः | का | द | म्ब | त्व | रि | त | म | व | ल | म्बः | स | भ | वि | ता |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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