बलादाक्रन्दन्ती रतपथिकमक्रूरमिलितं
विदूरादाभीरीततिरनुययौ येन रमणम् ।
तमादौ पन्थानं रचय चरितार्था भवतु ते
विराजन्ती सर्वोपरि परमहंसस्थितिरियम् ॥
बलादाक्रन्दन्ती रतपथिकमक्रूरमिलितं
विदूरादाभीरीततिरनुययौ येन रमणम् ।
तमादौ पन्थानं रचय चरितार्था भवतु ते
विराजन्ती सर्वोपरि परमहंसस्थितिरियम् ॥
विदूरादाभीरीततिरनुययौ येन रमणम् ।
तमादौ पन्थानं रचय चरितार्था भवतु ते
विराजन्ती सर्वोपरि परमहंसस्थितिरियम् ॥
अन्वयः
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अक्रूर-मिलितं रत-पथिकं रमणं बलात् आक्रन्दन्ती विदूरात् आभीरी-ततिः येन अनुययौ, तं पन्थानम् आदौ रचय। ते इयम् सर्व-उपरि विराजन्ती परमहंस-स्थितिः चरित-ार्था भवतु।
Summary
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First, follow the path where the wailing cowherd women pursued their beloved from afar as He departed with Akrūra. By taking this route, your exalted status as a parama-haṃsa will truly find its fulfillment.
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ब | ला | दा | क्र | न्द | न्ती | र | त | प | थि | क | म | क्रू | र | मि | लि | तं |
| वि | दू | रा | दा | भी | री | त | ति | र | नु | य | यौ | ये | न | र | म | णम् |
| त | मा | दौ | प | न्था | नं | र | च | य | च | रि | ता | र्था | भ | व | तु | ते |
| वि | रा | ज | न्ती | स | र्वो | प | रि | प | र | म | हं | स | स्थि | ति | रि | यम् |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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