नवीनस्त्वं कम्बो पशुपरमणीभिः परिचयं
न धत्से राधायाः गुणगरिमगन्धोऽपि न कृती ।
तथापि त्वां याचे हृदयनिहितं दोहदमहं
वहन्ते हि क्लान्ते प्रणयमवदातप्रकृतयः ॥
नवीनस्त्वं कम्बो पशुपरमणीभिः परिचयं
न धत्से राधायाः गुणगरिमगन्धोऽपि न कृती ।
तथापि त्वां याचे हृदयनिहितं दोहदमहं
वहन्ते हि क्लान्ते प्रणयमवदातप्रकृतयः ॥
न धत्से राधायाः गुणगरिमगन्धोऽपि न कृती ।
तथापि त्वां याचे हृदयनिहितं दोहदमहं
वहन्ते हि क्लान्ते प्रणयमवदातप्रकृतयः ॥
अन्वयः
AI
कम्बो! त्वम् नवीनः पशु-प-रमणीभिः परिचयम् न धत्से । राधायाः गुण-गरिमा-गन्धः अपि कृति (न) । तथापि हृदय-निहितम् दोहदम् अहम् त्वाम् याचे । अवदात-प्रकृतयः क्लान्ते हि प्रणयम् वहन्ते ॥
Summary
AI
'O conch, you are new and unfamiliar with the cowherd women; you are not even touched by the fragrance of *Rādhā*’s great qualities. Yet, I place this longing of my heart before you, for those of pure nature show love towards the weary.'
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | वी | न | स्त्वं | क | म्बो | प | शु | प | र | म | णी | भिः | प | रि | च | यं |
| न | ध | त्से | रा | धा | याः | गु | ण | ग | रि | म | ग | न्धो | ऽपि | न | कृ | ती |
| त | था | पि | त्वां | या | चे | हृ | द | य | नि | हि | तं | दो | ह | द | म | हं |
| व | ह | न्ते | हि | क्ला | न्ते | प्र | ण | य | म | व | दा | त | प्र | कृ | त | यः |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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