मुहुः कूजत्काञ्चीमणिवलयमञ्जीरमुरली-
रवालम्बो भ्राम्यद्युवतीकुलगीतैः सुरमणे ।
स किं साक्षाद्भावी पुनरपि हरेस्ताण्डवरसै-
रमन्दः कालिन्दीपुलिनभुवि तौर्यात्रिकभरः ॥
मुहुः कूजत्काञ्चीमणिवलयमञ्जीरमुरली-
रवालम्बो भ्राम्यद्युवतीकुलगीतैः सुरमणे ।
स किं साक्षाद्भावी पुनरपि हरेस्ताण्डवरसै-
रमन्दः कालिन्दीपुलिनभुवि तौर्यात्रिकभरः ॥
रवालम्बो भ्राम्यद्युवतीकुलगीतैः सुरमणे ।
स किं साक्षाद्भावी पुनरपि हरेस्ताण्डवरसै-
रमन्दः कालिन्दीपुलिनभुवि तौर्यात्रिकभरः ॥
अन्वयः
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सुर-मणे! मुहुः कूजत्-काञ्ची-मणि-वलय-मञ्जीर-मुरली-रव-आलम्बः भ्राम्यत्-युवती-कुल-गीतैः हरेः ताण्डव-रसैः अमन्दः सः तौर्यात्रिक-भरः किम् पुनः अपि कालिन्दी-पुलिन-भुवि साक्षात्-भावी? ॥
Summary
AI
'O divine gem, will that grand musical performance of *Hari*, supported by the tinkling of waist-bands, jeweled bangles, anklets, and the flute, and accompanied by the songs of wandering young women, ever manifest again on the banks of the *Kālindī*?'
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| मु | हुः | कू | ज | त्का | ञ्ची | म | णि | व | ल | य | म | ञ्जी | र | मु | र | ली |
| र | वा | ल | म्बो | भ्रा | म्य | द्यु | व | ती | कु | ल | गी | तैः | सु | र | म | णे |
| स | किं | सा | क्षा | द्भा | वी | पु | न | र | पि | ह | रे | स्ता | ण्ड | व | र | सै |
| र | म | न्दः | का | लि | न्दी | पु | लि | न | भु | वि | तौ | र्या | त्रि | क | भ | रः |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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