स वैदग्धीसिन्धुः कठिनमतिना दानपतिना
यया निन्ये तूर्णं पशुपयुवतीजीवनपतिः ।
तया गन्तव्या ते निखिलजगदेकप्रथितया
पदव्या भव्यानां तिलक किल दाशार्हनगरी ॥
स वैदग्धीसिन्धुः कठिनमतिना दानपतिना
यया निन्ये तूर्णं पशुपयुवतीजीवनपतिः ।
तया गन्तव्या ते निखिलजगदेकप्रथितया
पदव्या भव्यानां तिलक किल दाशार्हनगरी ॥
यया निन्ये तूर्णं पशुपयुवतीजीवनपतिः ।
तया गन्तव्या ते निखिलजगदेकप्रथितया
पदव्या भव्यानां तिलक किल दाशार्हनगरी ॥
अन्वयः
AI
तिलक! कठिन-मतिना दान-पतिना यया पशुप-युवती-जीवन-पतिः तूर्णं निन्ये, तया निखिल-जगत्-एक-प्रथितया पदव्या ते भव्यानां दाशार्ह-नगरी गन्तव्या।
Summary
AI
O jewel among birds! You must travel by that world-renowned path taken by the hard-hearted Akrūra when he swiftly led away the Lord of the gopīs' lives. That route will lead you to the city of the Daśārhas, the abode of the righteous.
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | वै | द | ग्धी | सि | न्धुः | क | ठि | न | म | ति | ना | दा | न | प | ति | ना |
| य | या | नि | न्ये | तू | र्णं | प | शु | प | यु | व | ती | जी | व | न | प | तिः |
| त | या | ग | न्त | व्या | ते | नि | खि | ल | ज | ग | दे | क | प्र | थि | त | या |
| प | द | व्या | भ | व्या | नां | ति | ल | क | कि | ल | दा | शा | र्ह | न | ग | री |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.