निरस्तप्रत्यूहं भवतु भवतो वर्त्मनि शिवं
समुत्तिष्ठ क्षिप्रं मनसि मुदमाधाय सदरं ।
अधस्ताद्धावन्तो लघु लघु समुत्ताननयनैर्
भवन्तं वीक्षन्तां कुतुकतरला गोपशिशवः ॥
निरस्तप्रत्यूहं भवतु भवतो वर्त्मनि शिवं
समुत्तिष्ठ क्षिप्रं मनसि मुदमाधाय सदरं ।
अधस्ताद्धावन्तो लघु लघु समुत्ताननयनैर्
भवन्तं वीक्षन्तां कुतुकतरला गोपशिशवः ॥
समुत्तिष्ठ क्षिप्रं मनसि मुदमाधाय सदरं ।
अधस्ताद्धावन्तो लघु लघु समुत्ताननयनैर्
भवन्तं वीक्षन्तां कुतुकतरला गोपशिशवः ॥
अन्वयः
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भवतः वर्त्मनि निरस्त-प्रत्यूहं शिवं भवतु। स-दरं मनसि मुदम् आधाय क्षिप्रं समुत्तिष्ठ। अधस्तात् धावन्तः गोप-शिशवः कुतुक-तरलाः समुत्तान-नयनैः भवन्तं लघु लघु वीक्षन्ताम्।
Summary
AI
May your path be auspicious and free from obstacles. Rise quickly, with joy and respect in your heart. Let the cowherd boys, running below in playful curiosity, gaze up at you with wide eyes as you glide gracefully through the sky.
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | र | स्त | प्र | त्यू | हं | भ | व | तु | भ | व | तो | व | र्त्म | नि | शि | वं |
| स | मु | त्ति | ष्ठ | क्षि | प्रं | म | न | सि | मु | द | मा | धा | य | स | द | रं |
| अ | ध | स्ता | द्धा | व | न्तो | ल | घु | ल | घु | स | मु | त्ता | न | न | य | नै |
| र्भ | व | न्तं | वी | क्ष | न्तां | कु | तु | क | त | र | ला | गो | प | शि | श | वः |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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