अतीतेयं वार्ता विरमतु पुरः पश्य सरले
वयस्यस्ते सोऽयं स्मितमधुरिमोन्मृष्टवदनः ।
भुजस्तम्भोल्लासादभिमतपरीरम्भरभसः
स्मरक्रीडासिन्धुः क्षिपति मयि बन्धुककुसुमम् ॥
अतीतेयं वार्ता विरमतु पुरः पश्य सरले
वयस्यस्ते सोऽयं स्मितमधुरिमोन्मृष्टवदनः ।
भुजस्तम्भोल्लासादभिमतपरीरम्भरभसः
स्मरक्रीडासिन्धुः क्षिपति मयि बन्धुककुसुमम् ॥
वयस्यस्ते सोऽयं स्मितमधुरिमोन्मृष्टवदनः ।
भुजस्तम्भोल्लासादभिमतपरीरम्भरभसः
स्मरक्रीडासिन्धुः क्षिपति मयि बन्धुककुसुमम् ॥
अन्वयः
AI
इयम् अतीता वार्ता विरमतु। सरले! पुरः पश्य। स्मृत-मधुरिम-उन्मृष्ट-वदनः भुज-स्तम्भ-उल्लासात् अभिमत-परीरम्भ-रभसः स्मर-क्रीडा-सिन्धुः सः अयम् ते वयस्यः मयि बन्धुक-कुसुमम् क्षिपति।
Summary
AI
Let this past talk cease. O simple one, look ahead! There is your friend, his face brightened by the sweetness of his smile. Ready for a desired embrace with his pillar-like arms, he is an ocean of amorous sports, and he is throwing a bandhūka flower at me.
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ती | ते | यं | वा | र्ता | वि | र | म | तु | पु | रः | प | श्य | स | र | ले |
| व | य | स्य | स्ते | सो | ऽयं | स्मि | त | म | धु | रि | मो | न्मृ | ष्ट | व | द | नः |
| भु | ज | स्त | म्भो | ल्ला | सा | द | भि | म | त | प | री | र | म्भ | र | भ | सः |
| स्म | र | क्री | डा | सि | न्धुः | क्षि | प | ति | म | यि | ब | न्धु | क | कु | सु | मम् |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
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