प्रयातो मां हित्वा यदि कठिनचूडामणिरसौ
पर्यातु स्वच्छन्दं मम समयधर्मः किल गतिः ।
इदं सोढुं का वा प्रभवति यतः स्वप्नकपटा-
दिहायातो वृन्दावनभुवि कलान् मां रमयति ॥
प्रयातो मां हित्वा यदि कठिनचूडामणिरसौ
पर्यातु स्वच्छन्दं मम समयधर्मः किल गतिः ।
इदं सोढुं का वा प्रभवति यतः स्वप्नकपटा-
दिहायातो वृन्दावनभुवि कलान् मां रमयति ॥
पर्यातु स्वच्छन्दं मम समयधर्मः किल गतिः ।
इदं सोढुं का वा प्रभवति यतः स्वप्नकपटा-
दिहायातो वृन्दावनभुवि कलान् मां रमयति ॥
अन्वयः
AI
यदि असौ कठिन-चूडामणिः मां हित्वा प्रयातः, स्वच्छन्दम् पर्यातु। मम समय-धर्मः किल गतिः। का वा इदम् सोढुम् प्रभवति यतः स्वप्न-कपटात् इह वृन्दावन-भुवि आयातः कलान् माम् रमयति।
Summary
AI
If that crest-jewel of hard-heartedness has left me and gone, let him go as he pleases; my only refuge is the duty of the time. But who can endure this? For he comes here to Vṛndāvana in the guise of a dream and delights me with his artistic charms.
छन्दः
शिखरिणी [१७: यमनसभलग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | या | तो | मां | हि | त्वा | य | दि | क | ठि | न | चू | डा | म | णि | र | सौ |
| प | र्या | तु | स्व | च्छ | न्दं | म | म | स | म | य | ध | र्मः | कि | ल | ग | तिः |
| इ | दं | सो | ढुं | का | वा | प्र | भ | व | ति | य | तः | स्व | प्न | क | प | टा |
| दि | हा | या | तो | वृ | न्दा | व | न | भु | वि | क | ला | न्मां | र | म | य | ति |
| य | म | न | स | भ | ल | ग | ||||||||||
Other texts to read
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.