तावच्चैधितमेधितव्यमवनौ यावन्महद्भिर्द्रुमै-
श्छायाभिः कुसुमैः फलैश्च पथिकाः शक्त्या समाराधिताः ।
कालोऽयं मम जीर्यतः पतितुमित्यास्ते तरोराशये
पान्थानां च पतत्रिणां च हृदये जातोऽयमस्मिन्क्षणे ॥
तावच्चैधितमेधितव्यमवनौ यावन्महद्भिर्द्रुमै-
श्छायाभिः कुसुमैः फलैश्च पथिकाः शक्त्या समाराधिताः ।
कालोऽयं मम जीर्यतः पतितुमित्यास्ते तरोराशये
पान्थानां च पतत्रिणां च हृदये जातोऽयमस्मिन्क्षणे ॥
श्छायाभिः कुसुमैः फलैश्च पथिकाः शक्त्या समाराधिताः ।
कालोऽयं मम जीर्यतः पतितुमित्यास्ते तरोराशये
पान्थानां च पतत्रिणां च हृदये जातोऽयमस्मिन्क्षणे ॥
अन्वयः
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अवनौ तावत् च एधितम्, तावत् एधितव्यम्, यावत् महद्भिः द्रुमैः शक्त्या छायाभिः कुसुमैः फलैः च पथिकाः समाराधिताः। "अयम् मम जीर्यतः पतितुम् कालः" इति तरोः आशये आस्ते। अस्मिन् क्षणे अयम् (आशयः) पान्थानाम् च पतत्रिणाम् च हृदये जातः।
Summary
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One has grown and should continue to grow on earth only as long as travelers are served, according to one's ability, with shade, flowers, and fruits, like great trees. The thought, "This is the time for me, who am old, to fall," exists in the tree's mind. At that same moment, this thought arises in the hearts of travelers and birds.
पदच्छेदः
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| तावत् | तावत् | so long |
| च | च | and |
| एधितम् | एधित (√एध्+क्त, १.१) | has grown |
| एधितव्यम् | एधितव्य (√एध्+तव्य, १.१) | should grow |
| अवनौ | अवनि (७.१) | on earth |
| यावत् | यावत् | as long as |
| महद्भिः | महत् (३.३) | by great |
| द्रुमैः | द्रुम (३.३) | trees |
| छायाभिः | छाया (३.३) | with shade |
| कुसुमैः | कुसुम (३.३) | with flowers |
| फलैः | फल (३.३) | with fruits |
| च | च | and |
| पथिकाः | पथिक (१.३) | travelers |
| शक्त्या | शक्ति (३.१) | according to ability |
| समाराधिताः | समाराधित (सम्+आ√राध्+क्त, १.३) | are served |
| कालः | काल (१.१) | time |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| मम | अस्मद् (६.१) | my |
| जीर्यतः | जीर्यत् (√जॄ+शतृ, ६.१) | of the one who is old |
| पतितुम् | पतितुम् (√पत्+तुमुन्) | to fall |
| इति | इति | thus |
| आस्ते | आस्ते (√आस् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | exists |
| तरोः | तरु (६.१) | of the tree |
| आशये | आशय (७.१) | in the mind |
| पान्थानाम् | पान्थ (६.३) | of travelers |
| च | च | and |
| पतत्रिणाम् | पतत्रिन् (६.३) | of birds |
| च | च | and |
| हृदये | हृदय (७.१) | in the heart |
| जातः | जात (√जन्+क्त, १.१) | is born |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| अस्मिन् | इदम् (७.१) | at this |
| क्षणे | क्षण (७.१) | moment |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ता | व | च्चै | धि | त | मे | धि | त | व्य | म | व | नौ | या | व | न्म | ह | द्भि | र्द्रु | मै |
| श्छा | या | भिः | कु | सु | मैः | फ | लै | श्च | प | थि | काः | श | क्त्या | स | मा | रा | धि | ताः |
| का | लो | ऽयं | म | म | जी | र्य | तः | प | ति | तु | मि | त्या | स्ते | त | रो | रा | श | ये |
| पा | न्था | नां | च | प | त | त्रि | णां | च | हृ | द | ये | जा | तो | ऽय | म | स्मि | न्क्ष | णे |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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