अस्त्यत्नैव किलार्णवे तदमृतं तत्रैव हालाहलः
सन्त्यस्मिन्मलये पटीरतरवस्तत्नैव वाताशनाः ।
यद्यद्वस्त्वभिजातमस्ति सविधे तत्तद्दुरापं नृणां
प्राप्तव्यं रसनाञ्चले करतले भाले च वेधा न्यधात् ॥
अस्त्यत्नैव किलार्णवे तदमृतं तत्रैव हालाहलः
सन्त्यस्मिन्मलये पटीरतरवस्तत्नैव वाताशनाः ।
यद्यद्वस्त्वभिजातमस्ति सविधे तत्तद्दुरापं नृणां
प्राप्तव्यं रसनाञ्चले करतले भाले च वेधा न्यधात् ॥
सन्त्यस्मिन्मलये पटीरतरवस्तत्नैव वाताशनाः ।
यद्यद्वस्त्वभिजातमस्ति सविधे तत्तद्दुरापं नृणां
प्राप्तव्यं रसनाञ्चले करतले भाले च वेधा न्यधात् ॥
अन्वयः
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किल अत्र एव अर्णवे तत् अमृतम् अस्ति, तत्र एव हालाहलः (अस्ति)। अस्मिन् मलये पटीर-तरवः सन्ति, तत्र एव वात-अशनाः (सन्ति)। यत् यत् अभिजातम् वस्तु सविधे अस्ति, तत् तत् नृणाम् दुरापम्। वेधाः प्राप्तव्यम् रसना-अञ्चले, कर-तले, भाले च न्यधात्।
Summary
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Indeed, in this very ocean, there is that nectar, but there too is the deadly poison. On this Malaya mountain, there are sandalwood trees, but there too are snakes. Whatever excellent thing exists nearby, it is difficult for men to obtain. The Creator has placed what is to be obtained on the tip of the tongue, the palm of the hand, and the forehead (i.e., through speech, effort, and destiny).
पदच्छेदः
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| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | there is |
| अत्र | अत्र | here |
| एव | एव | very |
| किल | किल | indeed |
| अर्णवे | अर्णव (७.१) | in the ocean |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| अमृतम् | अमृत (१.१) | nectar |
| तत्र | तत्र | there |
| एव | एव | also |
| हालाहलः | हालाहल (१.१) | the Halahala poison |
| सन्ति | सन्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | there are |
| अस्मिन् | इदम् (७.१) | on this |
| मलये | मलय (७.१) | Malaya mountain |
| पटीरतरवः | पटीर–तरु (१.३) | sandalwood trees |
| तत्र | तत्र | there |
| एव | एव | also |
| वाताशनाः | वात–अशन (१.३) | snakes (air-eaters) |
| यत् | यद् (१.१) | whatever |
| यत् | यद् (१.१) | whatever |
| वस्तु | वस्तु (१.१) | thing |
| अभिजातम् | अभिजात (१.१) | excellent |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | exists |
| सविधे | सविधे | nearby |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| दुरापम् | दुराप (१.१) | is difficult to obtain |
| नृणाम् | नृ (६.३) | for men |
| प्राप्तव्यम् | प्राप्तव्य (प्र√आप्+तव्य, २.१) | what is to be obtained |
| रसनाञ्चले | रसना–अञ्चल (७.१) | on the tip of the tongue |
| करतले | कर–तल (७.१) | on the palm of the hand |
| भाले | भाल (७.१) | on the forehead |
| च | च | and |
| वेधाः | वेधस् (१.१) | the Creator |
| न्यधात् | न्यधात् (नि√धा कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | placed |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | स्त्य | त्नै | व | कि | ला | र्ण | वे | त | द | मृ | तं | त | त्रै | व | हा | ला | ह | लः |
| स | न्त्य | स्मि | न्म | ल | ये | प | टी | र | त | र | व | स्त | त्नै | व | वा | ता | श | नाः |
| य | द्य | द्व | स्त्व | भि | जा | त | म | स्ति | स | वि | धे | त | त्त | द्दु | रा | पं | नृ | णां |
| प्रा | प्त | व्यं | र | स | ना | ञ्च | ले | क | र | त | ले | भा | ले | च | वे | धा | न्य | धात् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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