अस्ति स्वर्णमयोऽद्रिरस्ति विषयः क्षुत्तृड्भरावर्जितः
सन्ति क्षीरघृताकरा जलधयः सन्ति द्रुमाः कामदाः ।
किं नस्तच्चरिताद्भुतश्रवणतः साध्यं क्षुधा ताम्यतां
दृष्टं यत्सविधे विधेहि सुमते तत्रैव सर्वं श्रमम् ॥
अस्ति स्वर्णमयोऽद्रिरस्ति विषयः क्षुत्तृड्भरावर्जितः
सन्ति क्षीरघृताकरा जलधयः सन्ति द्रुमाः कामदाः ।
किं नस्तच्चरिताद्भुतश्रवणतः साध्यं क्षुधा ताम्यतां
दृष्टं यत्सविधे विधेहि सुमते तत्रैव सर्वं श्रमम् ॥
सन्ति क्षीरघृताकरा जलधयः सन्ति द्रुमाः कामदाः ।
किं नस्तच्चरिताद्भुतश्रवणतः साध्यं क्षुधा ताम्यतां
दृष्टं यत्सविधे विधेहि सुमते तत्रैव सर्वं श्रमम् ॥
अन्वयः
AI
स्वर्णमयः अद्रिः अस्ति, क्षुत्-तृट्-भर-वर्जितः विषयः अस्ति, क्षीर-घृत-आकराः जलधयः सन्ति, कामदाः द्रुमाः सन्ति। क्षुधा ताम्यताम् नः तत्-चरित-अद्भुत-श्रवणतः किम् साध्यम्? (हे) सुमते, यत् सविधे दृष्टम्, तत्र एव सर्वम् श्रमम् विधेहि।
Summary
AI
There is a mountain of gold, there is a land free from the burden of hunger and thirst, there are oceans that are mines of milk and ghee, and there are wish-fulfilling trees. For us who are suffering from hunger, what is to be gained by merely hearing of these wonderful things? O wise one, whatever is seen nearby, direct all your effort towards that alone.
पदच्छेदः
AI
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | there is |
| स्वर्णमयः | स्वर्णमय (१.१) | golden |
| अद्रिः | अद्रि (१.१) | a mountain |
| अस्ति | अस्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | there is |
| विषयः | विषय (१.१) | a land |
| क्षुत्तृड्भरावर्जितः | क्षुध्–तृष्–भर–वर्जित (१.१) | free from the burden of hunger and thirst |
| सन्ति | सन्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | there are |
| क्षीरघृताकराः | क्षीर–घृत–आकर (१.३) | mines of milk and ghee |
| जलधयः | जलधि (१.३) | oceans |
| सन्ति | सन्ति (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | there are |
| द्रुमाः | द्रुम (१.३) | trees |
| कामदाः | कामद (१.३) | wish-fulfilling |
| किम् | किम् (१.१) | what |
| नः | अस्मद् (६.३) | for us |
| तच्चरिताद्भुतश्रवणतः | तद्–चरित–अद्भुत–श्रवण (५.१) | from hearing of these wonderful things |
| साध्यम् | साध्य (√साध्+ण्यत्, १.१) | is to be gained |
| क्षुधा | क्षुध् (३.१) | by hunger |
| ताम्यताम् | ताम्यत् (√तम्+शतृ, ६.३) | of those who are suffering |
| दृष्टम् | दृष्ट (√दृश्+क्त, १.१) | is seen |
| यत् | यद् (१.१) | whatever |
| सविधे | सविधे | nearby |
| विधेहि | विधेहि (वि√धा कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | direct |
| सुमते | सुमति (८.१) | O wise one |
| तत्र | तत्र | there |
| एव | एव | alone |
| सर्वम् | सर्व (२.१) | all |
| श्रमम् | श्रम (२.१) | effort |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | स्ति | स्व | र्ण | म | यो | ऽद्रि | र | स्ति | वि | ष | यः | क्षु | त्तृ | ड्भ | रा | व | र्जि | तः |
| स | न्ति | क्षी | र | घृ | ता | क | रा | ज | ल | ध | यः | स | न्ति | द्रु | माः | का | म | दाः |
| किं | न | स्त | च्च | रि | ता | द्भु | त | श्र | व | ण | तः | सा | ध्यं | क्षु | धा | ता | म्य | तां |
| दृ | ष्टं | य | त्स | वि | धे | वि | धे | हि | सु | म | ते | त | त्रै | व | स | र्वं | श्र | मम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.