घ्नन्त्वेकत्र तरक्षवो मृगकुलं दावा दहन्त्यन्यतो
व्याधा वीतभयाः परत्र शतशो विध्यन्ति गृह्णन्ति च ।
किं त्वं वेत्सि कथामिमां मृगपते निद्रासि कोणे क्वचि-
द्दिष्ट्या चेदवबुध्यसे शमयसि द्वित्रान्वृथा दन्तिनः ॥
घ्नन्त्वेकत्र तरक्षवो मृगकुलं दावा दहन्त्यन्यतो
व्याधा वीतभयाः परत्र शतशो विध्यन्ति गृह्णन्ति च ।
किं त्वं वेत्सि कथामिमां मृगपते निद्रासि कोणे क्वचि-
द्दिष्ट्या चेदवबुध्यसे शमयसि द्वित्रान्वृथा दन्तिनः ॥
व्याधा वीतभयाः परत्र शतशो विध्यन्ति गृह्णन्ति च ।
किं त्वं वेत्सि कथामिमां मृगपते निद्रासि कोणे क्वचि-
द्दिष्ट्या चेदवबुध्यसे शमयसि द्वित्रान्वृथा दन्तिनः ॥
अन्वयः
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एकत्र तरक्षवः मृग-कुलम् घ्नन्तु, अन्यतः दावाः दहन्ति, परत्र वीत-भयाः व्याधाः शतशः विध्यन्ति गृह्णन्ति च। मृगपते, त्वम् इमाम् कथाम् किम् वेत्सि? क्वचित् कोणे निद्रासि। चेत् दिष्ट्या अवबुध्यसे, (तर्हि) वृथा द्वित्रान् दन्तिनः शमयसि।
Summary
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In one place, hyenas kill the deer herds; elsewhere, forest fires burn them; in another, fearless hunters pierce and capture them by the hundreds. O lord of the beasts (lion), do you know this story? You are sleeping somewhere in a corner. If by chance you wake up, you needlessly kill two or three elephants.
पदच्छेदः
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| घ्नन्तु | घ्नन्तु (√हन् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | let them kill |
| एकत्र | एकत्र | in one place |
| तरक्षवः | तरक्षु (१.३) | hyenas |
| मृगकुलम् | मृग–कुल (२.१) | the deer herd |
| दावाः | दाव (१.३) | forest fires |
| दहन्ति | दहन्ति (√दह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | burn |
| अन्यतः | अन्यतः | elsewhere |
| व्याधाः | व्याध (१.३) | hunters |
| वीतभयाः | वीत–भय (१.३) | fearless |
| परत्र | परत्र | in another place |
| शतशः | शतशः | by the hundreds |
| विध्यन्ति | विध्यन्ति (√व्यध् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | pierce |
| गृह्णन्ति | गृह्णन्ति (√ग्रह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | capture |
| च | च | and |
| किम् | किम् | do |
| त्वम् | युष्मद् (१.१) | you |
| वेत्सि | वेत्सि (√विद् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | know |
| कथाम् | कथा (२.१) | story |
| इमाम् | इदम् (२.१) | this |
| मृगपते | मृगपति (८.१) | O lord of beasts |
| निद्रासि | निद्रासि (√निद्रा कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you sleep |
| कोणे | कोण (७.१) | in a corner |
| क्वचित् | क्वचित् | somewhere |
| दिष्ट्या | दिष्ट्या | by chance |
| चेत् | चेत् | if |
| अवबुध्यसे | अवबुध्यसे (अव√बुध् कर्तरि लट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | you wake up |
| शमयसि | शमयसि (√शम् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | you kill |
| द्वित्रान् | द्वित्र (२.३) | two or three |
| वृथा | वृथा | needlessly |
| दन्तिनः | दन्तिन् (२.३) | elephants |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| घ्न | न्त्वे | क | त्र | त | र | क्ष | वो | मृ | ग | कु | लं | दा | वा | द | ह | न्त्य | न्य | तो |
| व्या | धा | वी | त | भ | याः | प | र | त्र | श | त | शो | वि | ध्य | न्ति | गृ | ह्ण | न्ति | च |
| किं | त्वं | वे | त्सि | क | था | मि | मां | मृ | ग | प | ते | नि | द्रा | सि | को | णे | क्व | चि |
| द्दि | ष्ट्या | चे | द | व | बु | ध्य | से | श | म | य | सि | द्वि | त्रा | न्वृ | था | द | न्ति | नः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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