खादन्ति क्षुधितास्तृणानि तृषिता गृह्णन्त्यपो निर्झरे
सीदन्तो गिरिकन्दरासु हरिणा येऽमी क्वचिच्छेरते ।
व्याधव्याघ्रदवानलप्रभृतयस्तेष्वेव सन्नाहिन-
स्तद्वा तिष्ठतु घातयन्ति मुनयोऽप्येतान्कथं चर्मणि ॥
खादन्ति क्षुधितास्तृणानि तृषिता गृह्णन्त्यपो निर्झरे
सीदन्तो गिरिकन्दरासु हरिणा येऽमी क्वचिच्छेरते ।
व्याधव्याघ्रदवानलप्रभृतयस्तेष्वेव सन्नाहिन-
स्तद्वा तिष्ठतु घातयन्ति मुनयोऽप्येतान्कथं चर्मणि ॥
सीदन्तो गिरिकन्दरासु हरिणा येऽमी क्वचिच्छेरते ।
व्याधव्याघ्रदवानलप्रभृतयस्तेष्वेव सन्नाहिन-
स्तद्वा तिष्ठतु घातयन्ति मुनयोऽप्येतान्कथं चर्मणि ॥
अन्वयः
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ये अमी हरिणाः क्षुधिताः (सन्तः) तृणानि खादन्ति, तृषिताः (सन्तः) निर्झरे अपः गृह्णन्ति, सीदन्तः (सन्तः) क्वचित् गिरि-कन्दरासु शेरते, तेषु एव व्याध-व्याघ्र-दवानल-प्रभृतयः सन्नाहिनः (भवन्ति)। तत् वा तिष्ठतु। मुनयः अपि एतान् चर्मणि कथम् घातयन्ति?
Summary
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These deer, when hungry, eat grass; when thirsty, they drink water from streams; and when tired, they rest somewhere in mountain caves. Hunters, tigers, forest fires, and the like are always ready to attack them. But let that be. Why do even sages have them killed for their skin?
पदच्छेदः
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| खादन्ति | खादन्ति (√खाद् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | eat |
| क्षुधिताः | क्षुधित (१.३) | hungry |
| तृणानि | तृण (२.३) | grass |
| तृषिताः | तृषित (१.३) | thirsty |
| गृह्णन्ति | गृह्णन्ति (√ग्रह् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | take |
| अपः | अप् (२.३) | water |
| निर्झरे | निर्झर (७.१) | from a stream |
| सीदन्तः | सीदत् (√सद्+शतृ, १.३) | tired |
| गिरिकन्दरासु | गिरि–कन्दरा (७.३) | in mountain caves |
| हरिणाः | हरिण (१.३) | deer |
| ये | यद् (१.३) | who |
| अमी | अदस् (१.३) | these |
| क्वचित् | क्वचित् | somewhere |
| शेरते | शेरते (√शी कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | rest |
| व्याधव्याघ्रदवानलप्रभृतयः | व्याध–व्याघ्र–दवानल–प्रभृति (१.३) | hunters, tigers, forest fires, and the like |
| तेषु | तद् (७.३) | towards them |
| एव | एव | only |
| सन्नाहिनः | सन्नाहिन् (१.३) | are ready to attack |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| वा | वा | or |
| तिष्ठतु | तिष्ठतु (√स्था कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let it be |
| घातयन्ति | घातयन्ति (√हन् +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | cause to be killed |
| मुनयः | मुनि (१.३) | sages |
| अपि | अपि | even |
| एतान् | एतद् (२.३) | them |
| कथम् | कथम् | why |
| चर्मणि | चर्मन् (७.१) | for skin |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| खा | द | न्ति | क्षु | धि | ता | स्तृ | णा | नि | तृ | षि | ता | गृ | ह्ण | न्त्य | पो | नि | र्झ | रे |
| सी | द | न्तो | गि | रि | क | न्द | रा | सु | ह | रि | णा | ये | ऽमी | क्व | चि | च्छे | र | ते |
| व्या | ध | व्या | घ्र | द | वा | न | ल | प्र | भृ | त | य | स्ते | ष्वे | व | स | न्ना | हि | न |
| स्त | द्वा | ति | ष्ठ | तु | घा | त | य | न्ति | मु | न | यो | ऽप्ये | ता | न्क | थं | च | र्म | णि |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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