सर्वासां सरितां पतिर्यदि यदि व्याप्ताः समस्ता दिशः
कल्पान्तेष्वपि वा न शुष्यति यदि स्वैरं तदङ्गीकृतम् ।
अम्भः स्वादु पिपासतः पथि परिश्रान्तस्य पान्थस्य किं
तेन स्यात्फलमर्णवोऽयमिति चेदिन्दुग्रहे स्नास्यताम् ॥
सर्वासां सरितां पतिर्यदि यदि व्याप्ताः समस्ता दिशः
कल्पान्तेष्वपि वा न शुष्यति यदि स्वैरं तदङ्गीकृतम् ।
अम्भः स्वादु पिपासतः पथि परिश्रान्तस्य पान्थस्य किं
तेन स्यात्फलमर्णवोऽयमिति चेदिन्दुग्रहे स्नास्यताम् ॥
कल्पान्तेष्वपि वा न शुष्यति यदि स्वैरं तदङ्गीकृतम् ।
अम्भः स्वादु पिपासतः पथि परिश्रान्तस्य पान्थस्य किं
तेन स्यात्फलमर्णवोऽयमिति चेदिन्दुग्रहे स्नास्यताम् ॥
अन्वयः
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यदि (त्वम्) सर्वासां सरितां पतिः, यदि (त्वया) समस्ताः दिशः व्याप्ताः, यदि वा कल्प-अन्तेषु अपि न शुष्यसि, तत् स्वैरम् अङ्गीकृतम्। (परन्तु) पथि परिश्रान्तस्य पिपासतः पान्थस्य स्वादु अम्भः (आवश्यकम्)। तेन (तव गौरवेण) किम् फलम् स्यात्? अयम् अर्णवः इति चेत्, इन्दुग्रहे स्नास्यताम् (जनैः)।
Summary
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If you are the lord of all rivers, if you pervade all directions, if you don't dry up even at the end of eons - all that is freely accepted. But what is the use of that to a tired and thirsty traveler on the path who needs sweet water? If the argument is "this is the great ocean," then let people use it for bathing during a lunar eclipse (implying it's not for drinking).
पदच्छेदः
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| सर्वासां | सर्व (६.३) | of all |
| सरितां | सरित् (६.३) | rivers |
| पतिः | पति (१.१) | lord |
| यदि | यदि | if |
| यदि | यदि | if |
| व्याप्ताः | व्याप्त (वि√आप्+क्त, १.३) | are pervaded |
| समस्ताः | समस्त (१.३) | all |
| दिशः | दिश् (१.३) | directions |
| कल्पान्तेष्वपि | कल्प–अन्त (७.३)–अपि | even at the end of eons |
| वा | वा | or |
| न | न | not |
| शुष्यति | शुष्यति (√शुष् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | it dries up |
| यदि | यदि | if |
| स्वैरम् | स्वैरम् | freely |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| अङ्गीकृतम् | अङ्गीकृत (१.१) | is accepted |
| अम्भः | अम्भस् (१.१) | water |
| स्वादु | स्वादु (१.१) | sweet |
| पिपासतः | पिपासत् (६.१) | of a thirsty |
| पथि | पथिन् (७.१) | on the path |
| परिश्रान्तस्य | परिश्रान्त (६.१) | tired |
| पान्थस्य | पान्थ (६.१) | traveler |
| किम् | किम् (१.१) | what |
| तेन | तद् (३.१) | by that |
| स्यात् | स्यात् (√अस् कर्तरि विधिलिङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | would be |
| फलम् | फल (१.१) | use |
| अर्णवः | अर्णव (१.१) | ocean |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| इति | इति | thus |
| चेत् | चेत् | if |
| इन्दुग्रहे | इन्दु–ग्रह (७.१) | during a lunar eclipse |
| स्नास्यताम् | स्नास्यताम् (√स्ना भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | let people bathe |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | र्वा | सां | स | रि | तां | प | ति | र्य | दि | य | दि | व्या | प्ताः | स | म | स्ता | दि | शः |
| क | ल्पा | न्ते | ष्व | पि | वा | न | शु | ष्य | ति | य | दि | स्वै | रं | त | द | ङ्गी | कृ | तम् |
| अ | म्भः | स्वा | दु | पि | पा | स | तः | प | थि | प | रि | श्रा | न्त | स्य | पा | न्थ | स्य | किं |
| ते | न | स्या | त्फ | ल | म | र्ण | वो | ऽय | मि | ति | चे | दि | न्दु | ग्र | हे | स्ना | स्य | ताम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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