किं चन्द्रो न पुरा बभूव किमिमे वृक्षाः पुरा नाभव-
न्किं सृष्टा अधुना पिका मधुकरा अद्योदपद्यन्त किम् ।
साहङ्कारममुं प्रपञ्चमखिलं भोक्तुं यदा प्राणिनां
प्रासीदद्रुहिणस्तदा समुदभूदाश्चर्यचर्यो मधुः ॥
किं चन्द्रो न पुरा बभूव किमिमे वृक्षाः पुरा नाभव-
न्किं सृष्टा अधुना पिका मधुकरा अद्योदपद्यन्त किम् ।
साहङ्कारममुं प्रपञ्चमखिलं भोक्तुं यदा प्राणिनां
प्रासीदद्रुहिणस्तदा समुदभूदाश्चर्यचर्यो मधुः ॥
न्किं सृष्टा अधुना पिका मधुकरा अद्योदपद्यन्त किम् ।
साहङ्कारममुं प्रपञ्चमखिलं भोक्तुं यदा प्राणिनां
प्रासीदद्रुहिणस्तदा समुदभूदाश्चर्यचर्यो मधुः ॥
अन्वयः
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किम् चन्द्रः पुरा न बभूव? किम् इमे वृक्षाः पुरा न अभवन्? किम् पिकाः अधुना सृष्टाः? किम् मधुकराः अद्य उदपद्यन्त? यदा प्राणिनाम् अमुम् अखिलम् प्रपञ्चम् साहङ्कारम् भोक्तुम् द्रुहिणः प्रासीदत्, तदा आश्चर्य-चर्यः मधुः समुदभूत्।
Summary
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Did the moon not exist before? Did these trees not exist before? Were the cuckoos created just now? Did the bees come into being today? When Brahma (the creator) was pleased to allow living beings to enjoy this entire universe with pride, then Spring, with its wondrous ways, came into existence.
पदच्छेदः
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| किम् | किम् | did |
| चन्द्रः | चन्द्र (१.१) | the moon |
| न | न | not |
| पुरा | पुरा | before |
| बभूव | बभूव (√भू कर्तरि लिट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | exist |
| किम् | किम् | did |
| इमे | इदम् (१.३) | these |
| वृक्षाः | वृक्ष (१.३) | trees |
| पुरा | पुरा | before |
| न | न | not |
| अभवन् | अभवन् (√भू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | exist |
| किम् | किम् | were |
| सृष्टाः | सृष्ट (√सृज्+क्त, १.३) | created |
| अधुना | अधुना | now |
| पिकाः | पिक (१.३) | cuckoos |
| मधुकराः | मधुकर (१.३) | bees |
| अद्य | अद्य | today |
| उदपद्यन्त | उदपद्यन्त (उद्√पद् कर्तरि लङ् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | come into being |
| किम् | किम् | ? |
| साहङ्कारम् | सह–अहङ्कार (२.१) | with pride |
| अमुम् | अदस् (२.१) | this |
| प्रपञ्चम् | प्रपञ्च (२.१) | universe |
| अखिलम् | अखिल (२.१) | entire |
| भोक्तुम् | भोक्तुम् (√भुज्+तुमुन्) | to enjoy |
| यदा | यदा | when |
| प्राणिनाम् | प्राणिन् (६.३) | for living beings |
| प्रासीदत् | प्रासीदत् (प्र√सद् कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | was pleased |
| द्रुहिणः | द्रुहिण (१.१) | Brahma |
| तदा | तदा | then |
| समुदभूत् | समुदभूत् (सम्+उद्√भू कर्तरि लङ् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | arose |
| आश्चर्यचर्यः | आश्चर्य–चर्य (१.१) | of wondrous ways |
| मधुः | मधु (१.१) | Spring |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| किं | च | न्द्रो | न | पु | रा | ब | भू | व | कि | मि | मे | वृ | क्षाः | पु | रा | ना | भ | व |
| न्किं | सृ | ष्टा | अ | धु | ना | पि | का | म | धु | क | रा | अ | द्यो | द | प | द्य | न्त | किम् |
| सा | ह | ङ्का | र | म | मुं | प्र | प | ञ्च | म | खि | लं | भो | क्तुं | य | दा | प्रा | णि | नां |
| प्रा | सी | द | द्रु | हि | ण | स्त | दा | स | मु | द | भू | दा | श्च | र्य | च | र्यो | म | धुः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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