कीटः कश्चन वृश्चिकः कियदयं प्राणी कियञ्चेष्टते
को भारो हननेऽस्य जीवति स वा कालं कियन्तं पुनः ।
नाम्नोऽप्यस्य कियद्विभेति जनता दूरे कियद्धावते
किं ब्रूमो गरलस्य दुर्विषहतां पुच्छाग्रशूकस्पृशः ॥
कीटः कश्चन वृश्चिकः कियदयं प्राणी कियञ्चेष्टते
को भारो हननेऽस्य जीवति स वा कालं कियन्तं पुनः ।
नाम्नोऽप्यस्य कियद्विभेति जनता दूरे कियद्धावते
किं ब्रूमो गरलस्य दुर्विषहतां पुच्छाग्रशूकस्पृशः ॥
को भारो हननेऽस्य जीवति स वा कालं कियन्तं पुनः ।
नाम्नोऽप्यस्य कियद्विभेति जनता दूरे कियद्धावते
किं ब्रूमो गरलस्य दुर्विषहतां पुच्छाग्रशूकस्पृशः ॥
अन्वयः
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वृश्चिकः कश्चन कीटः। अयम् प्राणी कियत्? कियत् च चेष्टते? अस्य हनने कः भारः? सः पुनः कियन्तम् कालम् वा जीवति? अस्य नाम्नः अपि जनता कियत् बिभेति? दूरे कियत् धावते? पुच्छ-अग्र-शूक-स्पृशः गरलस्य दुर्विषहताम् किम् ब्रूमः?
Summary
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The scorpion is just some insect. How big is this creature? How much does it move? What effort is there in killing it? And for how long does it live? Yet, how much people fear even its name! How far they run away! What can we say about the unbearable nature of the poison that touches the sting at the tip of its tail?
पदच्छेदः
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| कीटः | कीट (१.१) | an insect |
| कश्चन | कश्चन | some |
| वृश्चिकः | वृश्चिक (१.१) | the scorpion |
| कियत् | कियत् (१.१) | how big |
| अयम् | इदम् (१.१) | this |
| प्राणी | प्राणिन् (१.१) | creature |
| कियत् | कियत् | how much |
| च | च | and |
| चेष्टते | चेष्टते (√चेष्ट् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | moves |
| कः | किम् (१.१) | what |
| भारः | भार (१.१) | effort |
| हनने | हनन (७.१) | in killing |
| अस्य | इदम् (६.१) | its |
| जीवति | जीवति (√जीव् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | lives |
| सः | तद् (१.१) | it |
| वा | वा | or |
| कालम् | काल (२.१) | time |
| कियन्तम् | कियत् (२.१) | how long |
| पुनः | पुनः | again |
| नाम्नः | नामन् (५.१) | from the name |
| अपि | अपि | even |
| अस्य | इदम् (६.१) | its |
| कियत् | कियत् | how much |
| बिभेति | बिभेति (√भी कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | fears |
| जनता | जनता (१.१) | people |
| दूरे | दूर (७.१) | far |
| कियत् | कियत् | how much |
| धावते | धावते (√धाव् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | runs |
| किम् | किम् (२.१) | what |
| ब्रूमः | ब्रूमः (√ब्रू कर्तरि लट् (परस्मै.) उ.पु. बहु.) | can we say |
| गरलस्य | गरल (६.१) | of the poison |
| दुर्विषहताम् | दुर्विषह (दुर्√सह+खल्)–ता (२.१) | about the unbearable nature |
| पुच्छाग्रशूकस्पृशः | पुच्छ–अग्र–शूक–स्पृश् (६.१) | that touches the sting at the tip of the tail |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| की | टः | क | श्च | न | वृ | श्चि | कः | कि | य | द | यं | प्रा | णी | कि | य | ञ्चे | ष्ट | ते |
| को | भा | रो | ह | न | ने | ऽस्य | जी | व | ति | स | वा | का | लं | कि | य | न्तं | पु | नः |
| ना | म्नो | ऽप्य | स्य | कि | य | द्वि | भे | ति | ज | न | ता | दू | रे | कि | य | द्धा | व | ते |
| किं | ब्रू | मो | ग | र | ल | स्य | दु | र्वि | ष | ह | तां | पु | च्छा | ग्र | शू | क | स्पृ | शः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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