केनाध्यापितमास्थितं क्व नु कदाधीतं क्व वा वर्तितं
तद्विश्राम्यतु कुत्र जातमथ कैः पुष्टं तदालोच्यताम् ।
काले सोऽपि कुहूमुखो यदि जगत्कर्णामृतं कूजति
प्राग्जन्मार्जितभाग्यवैभवमिदं कः स्तोतुमीष्टे कविः ॥
केनाध्यापितमास्थितं क्व नु कदाधीतं क्व वा वर्तितं
तद्विश्राम्यतु कुत्र जातमथ कैः पुष्टं तदालोच्यताम् ।
काले सोऽपि कुहूमुखो यदि जगत्कर्णामृतं कूजति
प्राग्जन्मार्जितभाग्यवैभवमिदं कः स्तोतुमीष्टे कविः ॥
तद्विश्राम्यतु कुत्र जातमथ कैः पुष्टं तदालोच्यताम् ।
काले सोऽपि कुहूमुखो यदि जगत्कर्णामृतं कूजति
प्राग्जन्मार्जितभाग्यवैभवमिदं कः स्तोतुमीष्टे कविः ॥
अन्वयः
AI
(इदम्) केन अध्यापितम्? क्व नु आस्थितम्? कदा अधीतम्? क्व वा वर्तितम्? तत् विश्राम्यतु। अथ कुत्र जातम्? कैः पुष्टम्? तत् आलोच्यताम्। यदि सः कुहूमुखः अपि काले जगत्-कर्ण-अमृतम् कूजति, इदम् प्राग्-जन्म-अर्जित-भाग्य-वैभवम् (अस्ति)। कः कविः (इदम्) स्तोतुम् ईष्टे?
Summary
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By whom was it taught? Where was it practiced? When was it learned? Where was it performed? Let that be. Where was it born? By whom was it nurtured? Let that be considered. If, in due season, even the cuckoo coos nectar for the world's ears, this is the glorious result of fortune acquired in a previous birth. What poet is able to praise this?
पदच्छेदः
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| केन | किम् (३.१) | by whom |
| अध्यापितम् | अध्यापित (अधि+आ√इ+णिच्+क्त, १.१) | was taught |
| आस्थितम् | आस्थित (आ√स्था+क्त, १.१) | was practiced |
| क्व | क्व | where |
| नु | नु | indeed |
| कदा | कदा | when |
| अधीतम् | अधीत (अधि√इ+क्त, १.१) | was learned |
| क्व | क्व | where |
| वा | वा | or |
| वर्तितम् | वर्तित (√वृत्+क्त, १.१) | was performed |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| विश्राम्यतु | विश्राम्यतु (वि√श्रम् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let it rest |
| कुत्र | कुत्र | where |
| जातम् | जात (√जन्+क्त, १.१) | was born |
| अथ | अथ | then |
| कैः | किम् (३.३) | by whom |
| पुष्टम् | पुष्ट (√पुष्+क्त, १.१) | was nurtured |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| आलोच्यताम् | आलोच्यताम् (आ√लोच् भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | let it be considered |
| काले | काल (७.१) | in season |
| सः | तद् (१.१) | he |
| अपि | अपि | even |
| कुहूमुखः | कुहूमुख (१.१) | the cuckoo |
| यदि | यदि | if |
| जगत्कर्णामृतम् | जगत्–कर्ण–अमृत (२.१) | nectar for the world's ears |
| कूजति | कूजति (√कूज् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | coos |
| प्राग्जन्मार्जितभाग्यवैभवम् | प्राच्–जन्मन्–अर्जित (√ऋज्+क्त)–भाग्य–वैभव (१.१) | the glorious result of fortune acquired in a previous birth |
| इदम् | इदम् (१.१) | this |
| कः | किम् (१.१) | what |
| स्तोतुम् | स्तोतुम् (√स्तु+तुमुन्) | to praise |
| ईष्टे | ईष्टे (√ईश् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | is able |
| कविः | कवि (१.१) | poet |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| के | ना | ध्या | पि | त | मा | स्थि | तं | क्व | नु | क | दा | धी | तं | क्व | वा | व | र्ति | तं |
| त | द्वि | श्रा | म्य | तु | कु | त्र | जा | त | म | थ | कैः | पु | ष्टं | त | दा | लो | च्य | ताम् |
| का | ले | सो | ऽपि | कु | हू | मु | खो | य | दि | ज | ग | त्क | र्णा | मृ | तं | कू | ज | ति |
| प्रा | ग्ज | न्मा | र्जि | त | भा | ग्य | वै | भ | व | मि | दं | कः | स्तो | तु | मी | ष्टे | क | विः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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