शुद्धिं स्वामनुचिन्य मीननिवहैः पूर्णेऽपि पद्माकरे
स्वेनैवोपनतैर्मृणालवलयैर्जीवन्ति हंसाः सुखम् ।
ये त्वेते विमलास्ततोऽपि च बका ध्यानैकनिष्ठाः सदा
निर्द्वन्द्वा निभृताश्च बिभ्रति न ते यादोभिरेवोदरम् ॥
शुद्धिं स्वामनुचिन्य मीननिवहैः पूर्णेऽपि पद्माकरे
स्वेनैवोपनतैर्मृणालवलयैर्जीवन्ति हंसाः सुखम् ।
ये त्वेते विमलास्ततोऽपि च बका ध्यानैकनिष्ठाः सदा
निर्द्वन्द्वा निभृताश्च बिभ्रति न ते यादोभिरेवोदरम् ॥
स्वेनैवोपनतैर्मृणालवलयैर्जीवन्ति हंसाः सुखम् ।
ये त्वेते विमलास्ततोऽपि च बका ध्यानैकनिष्ठाः सदा
निर्द्वन्द्वा निभृताश्च बिभ्रति न ते यादोभिरेवोदरम् ॥
अन्वयः
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हंसाः स्वाम् शुद्धिम् अनुचिन्त्य, मीन-निवहैः पूर्णे अपि पद्माकरे, स्वेन एव उपनतैः मृणाल-वलयैः सुखम् जीवन्ति। ये तु एते बकाः ततः अपि विमलाः, सदा ध्यान-एक-निष्ठाः, निर्द्वन्द्वाः निभृताः च (सन्ति), ते यादोभिः एव उदरम् बिभ्रति।
Summary
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Considering their own purity, swans live happily on lotus stalks brought by themselves, even in a lotus pond full of fish. But these cranes, who appear even purer, always devoted to meditation, free from conflict, and calm—do they not fill their bellies with those very aquatic creatures? (The last part is rhetorical, implying they do).
पदच्छेदः
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| शुद्धिम् | शुद्धि (२.१) | purity |
| स्वाम् | स्व (२.१) | their own |
| अनुचिन्त्य | अनुचिन्त्य (अनु√चिन्त्+ल्यप्) | having considered |
| मीननिवहैः | मीन–निवह (३.३) | with shoals of fish |
| पूर्णे | पूर्ण (√पूर्+क्त, ७.१) | full |
| अपि | अपि | even |
| पद्माकरे | पद्म–आकर (७.१) | in the lotus pond |
| स्वेन | स्व (३.१) | by themselves |
| एव | एव | only |
| उपनतैः | उपनत (उप√नम्+क्त, ३.३) | brought |
| मृणालवलयैः | मृणाल–वलय (३.३) | by lotus stalks |
| जीवन्ति | जीवन्ति (√जीव् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | live |
| हंसाः | हंस (१.३) | swans |
| सुखम् | सुखम् | happily |
| ये | यद् (१.३) | who |
| तु | तु | but |
| एते | एतद् (१.३) | these |
| विमलाः | विमल (१.३) | pure |
| ततः | ततः | than them |
| अपि | अपि | even |
| च | च | and |
| बकाः | बक (१.३) | cranes |
| ध्यानैकनिष्ठाः | ध्यान–एक–निष्ठा (१.३) | devoted solely to meditation |
| सदा | सदा | always |
| निर्द्वन्द्वाः | निर्द्वन्द्व (१.३) | free from conflict |
| निभृताः | निभृत (नि√भृ+क्त, १.३) | calm |
| च | च | and |
| बिभ्रति | बिभ्रति (√भृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | fill |
| न | न | not |
| ते | तद् (१.३) | they |
| यादोभिः | यादस् (३.३) | with aquatic creatures |
| एव | एव | only |
| उदरम् | उदर (२.१) | their belly |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| शु | द्धिं | स्वा | म | नु | चि | न्य | मी | न | नि | व | हैः | पू | र्णे | ऽपि | प | द्मा | क | रे |
| स्वे | नै | वो | प | न | तै | र्मृ | णा | ल | व | ल | यै | र्जी | व | न्ति | हं | साः | सु | खम् |
| ये | त्वे | ते | वि | म | ला | स्त | तो | ऽपि | च | ब | का | ध्या | नै | क | नि | ष्ठाः | स | दा |
| नि | र्द्व | न्द्वा | नि | भृ | ता | श्च | बि | भ्र | ति | न | ते | या | दो | भि | रे | वो | द | रम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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