उन्मीलन्ति कियन्ति वा न कुसुमान्युष्णद्युतेरुद्गमे
तत्त्वे तावति बन्धुरित्यतिसखीत्यादित्यकान्तेति च ।
कीर्तिं दत्तवतां त्रिलोकविदितामेवं कवीनामृणं
किं कृत्वेयमपाकरोतु जनुषां कोट्यापि नालीकिनी ॥
उन्मीलन्ति कियन्ति वा न कुसुमान्युष्णद्युतेरुद्गमे
तत्त्वे तावति बन्धुरित्यतिसखीत्यादित्यकान्तेति च ।
कीर्तिं दत्तवतां त्रिलोकविदितामेवं कवीनामृणं
किं कृत्वेयमपाकरोतु जनुषां कोट्यापि नालीकिनी ॥
तत्त्वे तावति बन्धुरित्यतिसखीत्यादित्यकान्तेति च ।
कीर्तिं दत्तवतां त्रिलोकविदितामेवं कवीनामृणं
किं कृत्वेयमपाकरोतु जनुषां कोट्यापि नालीकिनी ॥
अन्वयः
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उष्णद्युतेः उद्गमे कियन्ति वा कुसुमानि न उन्मीलन्ति? तावति तत्त्वे (सति), (ताम्) बन्धुः इति, अतिसखी इति, आदित्यकान्ता इति च एवम् त्रिलोक-विदिताम् कीर्तिम् दत्तवताम् कवीनाम् ऋणम् इयम् नालीकिनी जनुषाम् कोट्या अपि किम् कृत्वा अपाकरोतु?
Summary
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How many flowers do not bloom at the rising of the sun? Despite this fact, what can this lotus plant do to repay the debt to the poets who gave it such world-renowned fame by calling it "kinsman," "dear friend," and "beloved of the sun," even with a crore of births?
पदच्छेदः
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| उन्मीलन्ति | उन्मीलन्ति (उद्√मील् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | bloom |
| कियन्ति | कियत् (१.३) | how many |
| वा | वा | indeed |
| न | न | not |
| कुसुमानि | कुसुम (१.३) | flowers |
| उष्णद्युतेः | उष्णद्युति (६.१) | of the sun |
| उद्गमे | उद्गम (७.१) | at the rising |
| तत्त्वे | तत्त्व (७.१) | fact |
| तावति | तावत् (७.१) | this much |
| बन्धुः | बन्धु (१.१) | kinsman |
| इति | इति | as |
| अतिसखी | अतिसखि (१.१) | dear friend |
| इति | इति | as |
| आदित्यकान्ता | आदित्यकान्ता (१.१) | beloved of the sun |
| इति | इति | as |
| च | च | and |
| कीर्तिं | कीर्ति (२.१) | fame |
| दत्तवतां | दत्तवत् (√दा+क्तवतु, ६.३) | of those who gave |
| त्रिलोकविदिताम् | त्रिलोक–विदित (२.१) | world-renowned |
| एवं | एवम् | such |
| कवीनाम् | कवि (६.३) | of the poets |
| ऋणं | ऋण (२.१) | the debt |
| किं | किम् (२.१) | what |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ+क्त्वा) | by doing |
| इयम् | इदम् (१.१) | this |
| अपाकरोतु | अपाकरोतु (अप+आ√कृ कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | can it repay |
| जनुषां | जनुस् (६.३) | of births |
| कोट्या | कोटि (३.१) | with a crore |
| अपि | अपि | even |
| नालीकिनी | नालीकिनी (१.१) | lotus plant |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | न्मी | ल | न्ति | कि | य | न्ति | वा | न | कु | सु | मा | न्यु | ष्ण | द्यु | ते | रु | द्ग | मे |
| त | त्त्वे | ता | व | ति | ब | न्धु | रि | त्य | ति | स | खी | त्या | दि | त्य | का | न्ते | ति | च |
| की | र्तिं | द | त्त | व | तां | त्रि | लो | क | वि | दि | ता | मे | वं | क | वी | ना | मृ | णं |
| किं | कृ | त्वे | य | म | पा | क | रो | तु | ज | नु | षां | को | ट्या | पि | ना | ली | कि | नी |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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