यच्छैलेषु यदर्णवेषु यदपि प्रामाटवीजाङ्गल-
प्रायासु क्षितिषु क्षिपन्ति बहुशस्तोयं वृथा तोयदाः ।
दृष्टिस्तत्र न दीयतां यदि गुणग्राही भवान्यत्पुनः
र्ग्रामेषूपवनेषु वा सकृदमी वर्षन्ति तद्गृह्यताम् ॥
यच्छैलेषु यदर्णवेषु यदपि प्रामाटवीजाङ्गल-
प्रायासु क्षितिषु क्षिपन्ति बहुशस्तोयं वृथा तोयदाः ।
दृष्टिस्तत्र न दीयतां यदि गुणग्राही भवान्यत्पुनः
र्ग्रामेषूपवनेषु वा सकृदमी वर्षन्ति तद्गृह्यताम् ॥
प्रायासु क्षितिषु क्षिपन्ति बहुशस्तोयं वृथा तोयदाः ।
दृष्टिस्तत्र न दीयतां यदि गुणग्राही भवान्यत्पुनः
र्ग्रामेषूपवनेषु वा सकृदमी वर्षन्ति तद्गृह्यताम् ॥
अन्वयः
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तोयदाः यत् शैलेषु, यत् अर्णवेषु, यत् अपि प्राम-अटवी-जाङ्गल-प्रायासु क्षितिषु बहुशः वृथा तोयम् क्षिपन्ति, तत्र दृष्टिः न दीयताम् । यदि भवान् गुण-ग्राही (अस्ति), यत् पुनः अमी ग्रामेषु उपवनेषु वा सकृत् वर्षन्ति, तत् गृह्यताम् ।
Summary
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Let no attention be paid to the fact that clouds often wastefully shed water on mountains, in oceans, and on lands that are mostly villages, forests, and arid regions. If you are one who appreciates merit, then take note of the fact that they do, at least once, rain on villages or gardens.
पदच्छेदः
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| यत् | यद् | that |
| शैलेषु | शैल (७.३) | on mountains |
| यत् | यद् | that |
| अर्णवेषु | अर्णव (७.३) | in oceans |
| यत् | यद् | that |
| अपि | अपि | also |
| प्रामाटवीजाङ्गलप्रायासु | प्राम–अटवी–जाङ्गल–प्राय (७.३) | mostly villages, forests, and arid regions |
| क्षितिषु | क्षिति (७.३) | on lands |
| क्षिपन्ति | क्षिपन्ति (√क्षिप् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they shed |
| बहुशः | बहुशस् | often |
| तोयं | तोय (२.१) | water |
| वृथा | वृथा | wastefully |
| तोयदाः | तोयद (१.३) | clouds |
| दृष्टिः | दृष्टि (१.१) | attention |
| तत्र | तत्र | there |
| न | न | not |
| दीयतां | दीयताम् (√दा भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | let be paid |
| यदि | यदि | if |
| गुणग्राही | गुण–ग्राहिन् (१.१) | one who appreciates merit |
| भवान् | भवत् (१.१) | you |
| यत् | यद् | that |
| पुनः | पुनर् | on the other hand |
| ग्रामेषु | ग्राम (७.३) | on villages |
| उपवनेषु | उपवन (७.३) | on gardens |
| वा | वा | or |
| सकृत् | सकृत् | at least once |
| अमी | अदस् (१.३) | they |
| वर्षन्ति | वर्षन्ति (√वृष् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | rain |
| तत् | तद् (१.१) | that |
| गृह्यताम् | गृह्यताम् (√ग्रह् भावकर्मणोः लोट् (आत्मने.) प्र.पु. एक.) | let it be noted |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | च्छै | ले | षु | य | द | र्ण | वे | षु | य | द | पि | प्रा | मा | ट | वी | जा | ङ्ग | ल |
| प्रा | या | सु | क्षि | ति | षु | क्षि | प | न्ति | ब | हु | श | स्तो | यं | वृ | था | तो | य | दाः |
| दृ | ष्टि | स्त | त्र | न | दी | य | तां | य | दि | गु | ण | ग्रा | ही | भ | वा | न्य | त्पु | नः |
| र्ग्रा | मे | षू | प | व | ने | षु | वा | स | कृ | द | मी | व | र्ष | न्ति | त | द्गृ | ह्य | ताम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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