उत्पत्तिर्मलये समुद्रनिलये पन्था वृतो राक्षसै-
स्तत्रत्यानपि हन्त चन्दनतरूश्छिन्दन्ति सांयाधिकाः ।
वर्तन्ते सविधस्थिताश्च सुखिनः शाखोटमुख्या द्रुमा-
स्तन्मन्ये कृतिनस्तु ते तरुकुले ये नोपयोगक्षमाः ॥
उत्पत्तिर्मलये समुद्रनिलये पन्था वृतो राक्षसै-
स्तत्रत्यानपि हन्त चन्दनतरूश्छिन्दन्ति सांयाधिकाः ।
वर्तन्ते सविधस्थिताश्च सुखिनः शाखोटमुख्या द्रुमा-
स्तन्मन्ये कृतिनस्तु ते तरुकुले ये नोपयोगक्षमाः ॥
स्तत्रत्यानपि हन्त चन्दनतरूश्छिन्दन्ति सांयाधिकाः ।
वर्तन्ते सविधस्थिताश्च सुखिनः शाखोटमुख्या द्रुमा-
स्तन्मन्ये कृतिनस्तु ते तरुकुले ये नोपयोगक्षमाः ॥
अन्वयः
AI
(चन्दनस्य) उत्पत्तिः समुद्र-निलये मलये, पन्थाः राक्षसैः वृतः । हन्त, सांयात्रिकाः तत्रत्यान् चन्दन-तरून् अपि छिन्दन्ति । सविध-स्थिताः शाखोट-मुख्याः द्रुमाः च सुखिनः वर्तन्ते । तत् (अहम्) मन्ये, तरुकुले ते तु कृतिनः ये उपयोग-क्षमाः न (सन्ति) ।
Summary
AI
The sandalwood tree's origin is on the Malaya mountain near the sea, and the path to it is beset by demons. Alas, merchants still cut down the sandalwood trees there. Meanwhile, nearby trees like the Shakota live happily. Therefore, I think that in the family of trees, only those are fortunate who are of no use.
पदच्छेदः
AI
| उत्पत्तिः | उत्पत्ति (१.१) | origin |
| मलये | मलय (७.१) | on the Malaya mountain |
| समुद्रनिलये | समुद्र–निलय (७.१) | near the sea |
| पन्थाः | पथिन् (१.१) | the path |
| वृतः | वृत (√वृ+क्त, १.१) | is beset |
| राक्षसैः | राक्षस (३.३) | by demons |
| तत्रत्यान् | तत्रत्य (२.३) | those there |
| अपि | अपि | even |
| हन्त | हन्त | alas |
| चन्दनतरून् | चन्दन–तरु (२.३) | the sandalwood trees |
| छिन्दन्ति | छिन्दन्ति (√छिद् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | cut down |
| सांयात्रिकाः | सांयात्रिक (१.३) | merchants |
| वर्तन्ते | वर्तन्ते (√वृत् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | live |
| सविधस्थिताः | सविध–स्थित (१.३) | nearby |
| च | च | and |
| सुखिनः | सुखिन् (१.३) | happily |
| शाखोटमुख्याः | शाखोट–मुख्य (१.३) | like the Shakota |
| द्रुमाः | द्रुम (१.३) | trees |
| तत् | तद् | therefore |
| मन्ये | मन्ये (√मन् कर्तरि लट् (आत्मने.) उ.पु. एक.) | I think |
| कृतिनः | कृतिन् (१.३) | are fortunate |
| तु | तु | indeed |
| ते | तद् (१.३) | those |
| तरुकुले | तरुकुल (७.१) | in the family of trees |
| ये | यद् (१.३) | who |
| न | न | not |
| उपयोगक्षमाः | उपयोग–क्षम (१.३) | are of use |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | त्प | त्ति | र्म | ल | ये | स | मु | द्र | नि | ल | ये | प | न्था | वृ | तो | रा | क्ष | सै |
| स्त | त्र | त्या | न | पि | ह | न्त | च | न्द | न | त | रू | श्छि | न्द | न्ति | सां | या | धि | काः |
| व | र्त | न्ते | स | वि | ध | स्थि | ता | श्च | सु | खि | नः | शा | खो | ट | मु | ख्या | द्रु | मा |
| स्त | न्म | न्ये | कृ | ति | न | स्तु | ते | त | रु | कु | ले | ये | नो | प | यो | ग | क्ष | माः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
About
Sanskrit Sahitya is a free, open-access digital library of classical Sanskrit literature with AI-powered tools and translations.