भग्नं भित्तिभिरालयैर्निपतितं स्रोतोभिराप्लावितं
विध्वस्तं पशुभिश्च सङ्घश इति क्रोशन्ति वृष्टे त्वया ।
त्वय्युद्गृह्णति वारि वारिद जना नश्यन्त्यवश्यं क्षणा-
कीर्तिं चिन्तय दुर्लभां न गणय क्षुद्रान्गुणान्मादृशाम् ॥
भग्नं भित्तिभिरालयैर्निपतितं स्रोतोभिराप्लावितं
विध्वस्तं पशुभिश्च सङ्घश इति क्रोशन्ति वृष्टे त्वया ।
त्वय्युद्गृह्णति वारि वारिद जना नश्यन्त्यवश्यं क्षणा-
कीर्तिं चिन्तय दुर्लभां न गणय क्षुद्रान्गुणान्मादृशाम् ॥
विध्वस्तं पशुभिश्च सङ्घश इति क्रोशन्ति वृष्टे त्वया ।
त्वय्युद्गृह्णति वारि वारिद जना नश्यन्त्यवश्यं क्षणा-
कीर्तिं चिन्तय दुर्लभां न गणय क्षुद्रान्गुणान्मादृशाम् ॥
अन्वयः
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(हे) वारिद, त्वया वृष्टे (सति), (सर्वम्) भित्तिभिः भग्नम्, आलयैः निपतितम्, स्रोतोभिः आप्लावितम्, पशुभिः च सङ्घशः विध्वस्तम् इति (जनाः) क्रोशन्ति । त्वयि वारि उद्गृह्णति (सति), जनाः अवश्यम् क्षणात् नश्यन्ति । (त्वम्) दुर्लभां आकीर्तिम् चिन्तय, मादृशाम् क्षुद्रान् गुणान् न गणय ।
Summary
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O cloud, when you rain, people cry out, "It's broken by the walls, fallen with the houses, flooded by streams, and destroyed in herds by the cattle!" But when you withhold water, people inevitably perish in a moment. Consider the infamy, which is hard to bear; do not count the petty merits praised by those like me.
पदच्छेदः
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| भग्नं | भग्न (√भञ्ज्+क्त, १.१) | broken |
| भित्तिभिः | भित्ति (३.३) | by the walls |
| आलयैः | आलय (३.३) | with the houses |
| निपतितं | निपतित (नि√पत्+क्त, १.१) | fallen |
| स्रोतोभिः | स्रोतस् (३.३) | by streams |
| आप्लावितं | आप्लावित (आ√प्लु+णिच्+क्त, १.१) | flooded |
| विध्वस्तं | विध्वस्त (वि√ध्वंस्+क्त, १.१) | destroyed |
| पशुभिः | पशु (३.३) | by the cattle |
| च | च | and |
| सङ्घशः | सङ्घशस् | in herds |
| इति | इति | thus |
| क्रोशन्ति | क्रोशन्ति (√क्रुश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | they cry out |
| वृष्टे | वृष्ट (√वृष्+क्त, ७.१) | when it has rained |
| त्वया | युष्मद् (३.१) | by you |
| त्वयि | युष्मद् (७.१) | when you |
| उद्गृह्णति | उद्गृह्णत् (उद्√ग्रह्+शत्रृ, ७.१) | withhold |
| वारि | वारि (२.१) | water |
| वारिद | वारिद (८.१) | O cloud |
| जनाः | जन (१.३) | people |
| नश्यन्ति | नश्यन्ति (√नश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | perish |
| अवश्यं | अवश्यम् | inevitably |
| क्षणात् | क्षण (५.१) | in a moment |
| आकीर्तिं | आकीर्ति (२.१) | infamy |
| चिन्तय | चिन्तय (√चिन्त् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | consider |
| दुर्लभां | दुर्लभ (२.१) | hard to bear |
| न | न | do not |
| गणय | गणय (√गण् कर्तरि लोट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | count |
| क्षुद्रान् | क्षुद्र (२.३) | the petty |
| गुणान् | गुण (२.३) | merits |
| मादृशाम् | मादृश (६.३) | of those like me |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| भ | ग्नं | भि | त्ति | भि | रा | ल | यै | र्नि | प | ति | तं | स्रो | तो | भि | रा | प्ला | वि | तं |
| वि | ध्व | स्तं | प | शु | भि | श्च | स | ङ्घ | श | इ | ति | क्रो | श | न्ति | वृ | ष्टे | त्व | या |
| त्व | य्यु | द्गृ | ह्ण | ति | वा | रि | वा | रि | द | ज | ना | न | श्य | न्त्य | व | श्यं | क्ष | णा |
| की | र्तिं | चि | न्त | य | दु | र्ल | भां | न | ग | ण | य | क्षु | द्रा | न्गु | णा | न्मा | दृ | शाम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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