निघ्नन्तोऽशनिभिस्तडिद्विलसितैश्चक्षुर्हरन्तो नृणां
विध्यन्तश्च शिलाशतैः परिचिताः प्रायेण धाराधराः ।
वर्षन्तो निभृताश्चिरं च समये दृष्टाश्च केचिद्धना
यैरव्याजपरोपकारनिरतैर्जात्या यशः स्थापितम् ॥
निघ्नन्तोऽशनिभिस्तडिद्विलसितैश्चक्षुर्हरन्तो नृणां
विध्यन्तश्च शिलाशतैः परिचिताः प्रायेण धाराधराः ।
वर्षन्तो निभृताश्चिरं च समये दृष्टाश्च केचिद्धना
यैरव्याजपरोपकारनिरतैर्जात्या यशः स्थापितम् ॥
विध्यन्तश्च शिलाशतैः परिचिताः प्रायेण धाराधराः ।
वर्षन्तो निभृताश्चिरं च समये दृष्टाश्च केचिद्धना
यैरव्याजपरोपकारनिरतैर्जात्या यशः स्थापितम् ॥
अन्वयः
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प्रायेण धाराधराः अशनिभिः निघ्नन्तः, तडित्-विलसितैः नृणाम् चक्षुः हरन्तः, शिला-शतैः च विध्यन्तः परिचिताः । केचित् घनाः च समये चिरम् निभृताः वर्षन्तः दृष्टाः, यैः अव्याज-परोपकार-निरतैः जात्या यशः स्थापितम् ।
Summary
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Clouds are generally known for striking with thunderbolts, blinding people with flashes of lightning, and piercing with hundreds of hailstones. However, some clouds are also seen raining quietly and for a long time at the proper season. It is by these clouds, engaged in selfless help to others, that the reputation of their entire kind has been established.
पदच्छेदः
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| निघ्नन्तः | निघ्नत् (√हन्+शत्रृ, १.३) | striking |
| अशनिभिः | अशनि (३.३) | with thunderbolts |
| तडिद्विलसितैः | तडित्–विलसित (३.३) | with flashes of lightning |
| चक्षुः | चक्षुस् (२.१) | the eyes |
| हरन्तः | हरत् (√हृ+शत्रृ, १.३) | blinding |
| नृणां | नृ (६.३) | of people |
| विध्यन्तः | विध्यत् (√व्यध्+शत्रृ, १.३) | piercing |
| च | च | and |
| शिलाशतैः | शिला–शत (३.३) | with hundreds of hailstones |
| परिचिताः | परिचित (परि√चि+क्त, १.३) | are known |
| प्रायेण | प्रायेण | generally |
| धाराधराः | धाराधर (१.३) | clouds |
| वर्षन्तः | वर्षत् (√वृष्+शत्रृ, १.३) | raining |
| निभृताः | निभृत (१.३) | quietly |
| चिरं | चिरम् | for a long time |
| च | च | and |
| समये | समय (७.१) | at the proper season |
| दृष्टाः | दृष्ट (√दृश्+क्त, १.३) | are seen |
| च | च | also |
| केचित् | कश्चित् (१.३) | some |
| घनाः | घन (१.३) | clouds |
| यैः | यद् (३.३) | by whom |
| अव्याजपरोपकारनिरतैः | अव्याज–परोपकार–निरत (३.३) | engaged in selfless help to others |
| जात्या | जाति (३.१) | for their kind |
| यशः | यशस् (१.१) | reputation |
| स्थापितम् | स्थापित (√स्था+णिच्+क्त, १.१) | has been established |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | घ्न | न्तो | ऽश | नि | भि | स्त | डि | द्वि | ल | सि | तै | श्च | क्षु | र्ह | र | न्तो | नृ | णां |
| वि | ध्य | न्त | श्च | शि | ला | श | तैः | प | रि | चि | ताः | प्रा | ये | ण | धा | रा | ध | राः |
| व | र्ष | न्तो | नि | भृ | ता | श्चि | रं | च | स | म | ये | दृ | ष्टा | श्च | के | चि | द्ध | ना |
| यै | र | व्या | ज | प | रो | प | का | र | नि | र | तै | र्जा | त्या | य | शः | स्था | पि | तम् |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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