निद्रालस्यशरीरसादवमनान्नद्वेषकासज्वर-
श्वासश्वेतिमहिक्किकाप्रभृतयो मासेषु मातुर्ध्रुवाः ।
जातस्तत्क्षणमेव नश्यतु शतं वर्षाणि वा जीवतु
स्वर्गे वा पितरौ दधातु नरके वा पातयत्व ञ्जसा ॥
निद्रालस्यशरीरसादवमनान्नद्वेषकासज्वर-
श्वासश्वेतिमहिक्किकाप्रभृतयो मासेषु मातुर्ध्रुवाः ।
जातस्तत्क्षणमेव नश्यतु शतं वर्षाणि वा जीवतु
स्वर्गे वा पितरौ दधातु नरके वा पातयत्व ञ्जसा ॥
श्वासश्वेतिमहिक्किकाप्रभृतयो मासेषु मातुर्ध्रुवाः ।
जातस्तत्क्षणमेव नश्यतु शतं वर्षाणि वा जीवतु
स्वर्गे वा पितरौ दधातु नरके वा पातयत्व ञ्जसा ॥
अन्वयः
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मातुः मासेषु निद्रा-आलस्य-शरीर-साद-वमन-अन्नद्वेष-कास-ज्वर-श्वास-श्वेतिम-हिक्किका-प्रभृतयः ध्रुवाः (भवन्ति) । जातः (पुत्रः) तत्-क्षणम् एव नश्यतु, शतम् वर्षाणि वा जीवतु, पितरौ स्वर्गे वा दधातु, नरके वा अञ्जसा पातयतु ।
Summary
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During the months of pregnancy, sleepiness, lethargy, bodily fatigue, vomiting, aversion to food, cough, fever, shortness of breath, paleness, hiccups, and the like are certain for a mother. Let the child, once born, perish that very moment or live for a hundred years; let him place his parents in heaven or cast them straight into hell.
पदच्छेदः
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| निद्रालस्यशरीरसादवमनान्नद्वेषकासज्वरश्वासश्वेतिमहिक्किकाप्रभृतयः | निद्रा–आलस्य–शरीर–साद–वमन–अन्नद्वेष–कास–ज्वर–श्वास–श्वेतिमन्–हिक्किका–प्रभृति (१.३) | sleepiness, lethargy, bodily fatigue, vomiting, aversion to food, cough, fever, shortness of breath, paleness, hiccups, and the like |
| मासेषु | मास (७.३) | during the months |
| मातुः | मातृ (६.१) | of a mother |
| ध्रुवाः | ध्रुव (१.३) | are certain |
| जातः | जात (√जन्+क्त, १.१) | the born one |
| तत्क्षणम् | तत्–क्षणम् | that very moment |
| एव | एव | itself |
| नश्यतु | नश्यतु (√नश् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let him perish |
| शतं | शत (२.१) | a hundred |
| वर्षाणि | वर्ष (२.३) | years |
| वा | वा | or |
| जीवतु | जीवतु (√जीव् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let him live |
| स्वर्गे | स्वर्ग (७.१) | in heaven |
| वा | वा | or |
| पितरौ | पितृ (२.२) | parents |
| दधातु | दधातु (√धा कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let him place |
| नरके | नरक (७.१) | in hell |
| वा | वा | or |
| पातयतु | पातयतु (√पत् +णिच् कर्तरि लोट् (परस्मै.) प्र.पु. एक.) | let him cast |
| अञ्जसा | अञ्जसा | straight |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| नि | द्रा | ल | स्य | श | री | र | सा | द | व | म | ना | न्न | द्वे | ष | का | स | ज्व | र |
| श्वा | स | श्वे | ति | म | हि | क्कि | का | प्र | भृ | त | यो | मा | से | षु | मा | तु | र्ध्रु | वाः |
| जा | त | स्त | त्क्ष | ण | मे | व | न | श्य | तु | श | तं | व | र्षा | णि | वा | जी | व | तु |
| स्व | र्गे | वा | पि | त | रौ | द | धा | तु | न | र | के | वा | पा | त | य | त्व | ञ्ज | सा |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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