जायन्ते विजने वने क्षितिरुहो यद्यप्यमी दुर्भगाः
सर्वे ते वटुभिस्तथापि न तथा बोद्धुं क्षमास्तुल्यवत् ।
आक्रान्तेष्वपि तेषु केषुचिदतिक्रूरक्रियैः श्वापदै-
र्गृह्यन्ते कतिचिद्यतः शमधनैर्ब्रह्मर्षिभिः पावनैः ॥
जायन्ते विजने वने क्षितिरुहो यद्यप्यमी दुर्भगाः
सर्वे ते वटुभिस्तथापि न तथा बोद्धुं क्षमास्तुल्यवत् ।
आक्रान्तेष्वपि तेषु केषुचिदतिक्रूरक्रियैः श्वापदै-
र्गृह्यन्ते कतिचिद्यतः शमधनैर्ब्रह्मर्षिभिः पावनैः ॥
सर्वे ते वटुभिस्तथापि न तथा बोद्धुं क्षमास्तुल्यवत् ।
आक्रान्तेष्वपि तेषु केषुचिदतिक्रूरक्रियैः श्वापदै-
र्गृह्यन्ते कतिचिद्यतः शमधनैर्ब्रह्मर्षिभिः पावनैः ॥
अन्वयः
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यदि अपि अमी क्षितिरुहः विजने वने जायन्ते, (ते) दुर्भगाः । तथापि सर्वे ते वटुभिः तुल्यवत् तथा बोद्धुम् न क्षमाः । यतः तेषु केषुचित् अतिक्रूर-क्रियैः श्वापदैः आक्रान्तेषु अपि, कतिचित् शम-धनैः पावनैः ब्रह्मर्षिभिः गृह्यन्ते ।
Summary
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Although these trees are born in a desolate forest and are unfortunate, still, they are not all to be considered equally worthless by Brahmacharins. Because, even when some of them are infested by beasts of extremely cruel deeds, a few are chosen by purifying Brahmarshis whose wealth is tranquility.
पदच्छेदः
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| जायन्ते | जायन्ते (√जन् कर्तरि लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | are born |
| विजने | विजन (७.१) | in a desolate |
| वने | वन (७.१) | forest |
| क्षितिरुहः | क्षितिरुह (१.३) | trees |
| यदि | यदि | although |
| अपि | अपि | even |
| अमी | अदस् (१.३) | these |
| दुर्भगाः | दुर्भग (१.३) | are unfortunate |
| सर्वे | सर्व (१.३) | all |
| ते | तद् (१.३) | they |
| वटुभिः | वटु (३.३) | by Brahmacharins |
| तथापि | तथापि | still |
| न | न | not |
| तथा | तथा | so |
| बोद्धुं | बोद्धुम् (√बुध्+तुमुन्) | to be considered |
| क्षमाः | क्षम (१.३) | fit |
| तुल्यवत् | तुल्यवत् | equally |
| आक्रान्तेषु | आक्रान्त (आ√क्रम्+क्त, ७.३) | when infested |
| अपि | अपि | even |
| तेषु | तद् (७.३) | among them |
| केषुचित् | कश्चित् (७.३) | some |
| अतिक्रूरक्रियैः | अतिक्रूर–क्रिय (३.३) | by those of extremely cruel deeds |
| श्वापदैः | श्वापद (३.३) | by beasts of prey |
| गृह्यन्ते | गृह्यन्ते (√ग्रह् भावकर्मणोः लट् (आत्मने.) प्र.पु. बहु.) | are chosen |
| कतिचित् | कतिचित् (१.३) | a few |
| यतः | यतः | because |
| शमधनैः | शम–धन (३.३) | by those whose wealth is tranquility |
| ब्रह्मर्षिभिः | ब्रह्मर्षि (३.३) | by Brahmarshis |
| पावनैः | पावन (३.३) | purifying |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| जा | य | न्ते | वि | ज | ने | व | ने | क्षि | ति | रु | हो | य | द्य | प्य | मी | दु | र्भ | गाः |
| स | र्वे | ते | व | टु | भि | स्त | था | पि | न | त | था | बो | द्धुं | क्ष | मा | स्तु | ल्य | वत् |
| आ | क्रा | न्ते | ष्व | पि | ते | षु | के | षु | चि | द | ति | क्रू | र | क्रि | यैः | श्वा | प | दै |
| र्गृ | ह्य | न्ते | क | ति | चि | द्य | तः | श | म | ध | नै | र्ब्र | ह्म | र्षि | भिः | पा | व | नैः |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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