अध्वन्याः किल मूलगर्तमधुनाप्यापूरयन्त्यश्रुभि-
र्व्याक्रोशन्त्यधुना सबान्धवकुलाः सायं मुहूर्तं द्विजाः ।
इत्थं यावदिमानि बिभ्रति शुचं भूतान्यपि त्वत्कृते
तावत्त्वं न गतोऽसि पादप चिरं कीर्त्यात्मना वर्तसे ॥
अध्वन्याः किल मूलगर्तमधुनाप्यापूरयन्त्यश्रुभि-
र्व्याक्रोशन्त्यधुना सबान्धवकुलाः सायं मुहूर्तं द्विजाः ।
इत्थं यावदिमानि बिभ्रति शुचं भूतान्यपि त्वत्कृते
तावत्त्वं न गतोऽसि पादप चिरं कीर्त्यात्मना वर्तसे ॥
र्व्याक्रोशन्त्यधुना सबान्धवकुलाः सायं मुहूर्तं द्विजाः ।
इत्थं यावदिमानि बिभ्रति शुचं भूतान्यपि त्वत्कृते
तावत्त्वं न गतोऽसि पादप चिरं कीर्त्यात्मना वर्तसे ॥
अन्वयः
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पादप, अध्वन्याः किल अधुना अपि अश्रुभिः मूल-गर्तम् आपूरयन्ति । सबान्धव-कुलाः द्विजाः अधुना सायम् मुहूर्तम् व्याक्रोशन्ति । इत्थम् यावत् इमानि भूतानि अपि त्वत्-कृते शुचम् बिभ्रति, तावत् त्वम् गतः न असि, (त्वम्) कीर्ति-आत्मना चिरम् वर्तसे ।
Summary
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O tree! Even now, travelers fill the pit of your roots with their tears. Birds with their families cry out for a moment at dusk. As long as these beings grieve for your sake, you have not departed; you exist forever in the form of your fame.
पदच्छेदः
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| अध्वन्याः | अध्वन्य (१.३) | travelers |
| किल | किल | indeed |
| मूलगर्तम् | मूल–गर्त (२.१) | the pit of the roots |
| अधुना | अधुना | now |
| अपि | अपि | even |
| आपूरयन्ति | आपूरयन्ति (आ√पृ +णिच् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | fill |
| अश्रुभिः | अश्रु (३.३) | with tears |
| व्याक्रोशन्ति | व्याक्रोशन्ति (वि+आ√क्रुश् कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | cry out |
| अधुना | अधुना | now |
| सबान्धवकुलाः | सबान्धव–कुल (१.३) | with their families |
| सायं | सायम् | at dusk |
| मुहूर्तं | मुहूर्त (२.१) | for a moment |
| द्विजाः | द्विज (१.३) | birds |
| इत्थं | इत्थम् | thus |
| यावत् | यावत् | as long as |
| इमानि | इदम् (१.३) | these |
| बिभ्रति | बिभ्रति (√भृ कर्तरि लट् (परस्मै.) प्र.पु. बहु.) | bear |
| शुचं | शुच् (२.१) | grief |
| भूतानि | भूत (१.३) | beings |
| अपि | अपि | also |
| त्वत्कृते | त्वत्–कृते | for your sake |
| तावत् | तावत् | so long |
| त्वं | युष्मद् (१.१) | you |
| न | न | not |
| गतः | गत (√गम्+क्त, १.१) | are gone |
| असि | असि (√अस् कर्तरि लट् (परस्मै.) म.पु. एक.) | are |
| पादप | पादप (८.१) | O tree |
| चिरं | चिरम् | forever |
| कीर्त्यात्मना | कीर्ति–आत्मन् (३.१) | in the form of fame |
| वर्तसे | वर्तसे (√वृत् कर्तरि लट् (आत्मने.) म.पु. एक.) | you exist |
छन्दः
शार्दूलविक्रीडितम् [१९: मसजसततग]
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ | १३ | १४ | १५ | १६ | १७ | १८ | १९ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | ध्व | न्याः | कि | ल | मू | ल | ग | र्त | म | धु | ना | प्या | पू | र | य | न्त्य | श्रु | भि |
| र्व्या | क्रो | श | न्त्य | धु | ना | स | बा | न्ध | व | कु | लाः | सा | यं | मु | हू | र्तं | द्वि | जाः |
| इ | त्थं | या | व | दि | मा | नि | बि | भ्र | ति | शु | चं | भू | ता | न्य | पि | त्व | त्कृ | ते |
| ता | व | त्त्वं | न | ग | तो | ऽसि | पा | द | प | चि | रं | की | र्त्या | त्म | ना | व | र्त | से |
| म | स | ज | स | त | त | ग | ||||||||||||
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